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अतिपिछड़ों का साथ लेकर योगी सरकार सत्ता में दोबारा लौटने का बना रही प्लान

लखनऊ। यूपी के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 6 महीने रह गए हैं। फरवरी में आचार संहिता लगने के आसार हैं। उससे ठीक पहले सीएम योगी आदित्यनाथ एक बड़ा फैसला लेने की ओर बढ़ रहे हैं। उनका इरादा यूपी के अतिपिछड़ों को साथ जोड़कर दोबारा बीजेपी को यूपी की सत्ता दिलाना है। बुधवार को विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा के दौरान इसके संकेत मिले। सरकार जो करने जा रही है, उससे विपक्ष के हाथ से अतिपिछड़ों का मुद्दा पूरी तरह फिसल गया है।

विधानसभा में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर ने अति पिछड़ों को रिजर्वेशन का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय समिति साल 2018 में अपनी रिपोर्ट दे चुकी है, लेकिन अति पिछड़ों को रिजर्वेशन अब तक नहीं दिया गया। इस पर योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार रिपोर्ट को देख रही है और चाहती है कि जब रिपोर्ट लागू हो, तो कोई उसे कोर्ट में चैलेंज न करे। उन्होंने नीट में रिजर्वेशन के मसले पर कहा कि सरकार की नीयत साफ है, तभी पिछड़ों को रिजर्वेशन दिया गया।

बीते दिनों इसी मसले पर सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से मिले थे। दोनों से मिलकर निषाद ने कहा था कि बीजेपी अति पिछड़ों को भी रिजर्वेशन देने वाली है। निषाद के इस बयान और अब यूपी विधानसभा में योगी सरकार के मंत्री अनिल राजभर की बात ये साबित कर रही है कि बीजेपी चुनाव से पहले अति पिछड़ा रिजर्वेशन कार्ड खेलकर विपक्ष को पटकनी देने की तैयारी कर रही है।

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