नई दिल्ली। इंडिगो संकट के दौरान यात्रियों से अनाप-शनाप किराया वसूलने वाली अन्य एयरलाइंस पर मोदी सरकार ने हंटर चलाया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सख्ती दिखाते हुए सभी एयरलाइंस पर किराए का कैप लगा दिया है। मंत्रालय ने इन एयरलाइंस से साफ कहा है कि वे स्थिति सामान्य होने तक मनमाना किराया नहीं ले सकतीं। उनको यात्रियों से उड़ान के लिए तय किराया ही लेना होगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय विमान किरायों की रियल टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है। सरकार के हंटर के बाद अब हवाई यात्रा करने वालों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इंडिगो की हजारों फ्लाइट्स कैंसल होने के साथ ही जब एयरपोर्ट्स पर यात्री फंस गए, तो अन्य एयरलाइंस ने मौका देखते हुए मनमाना किराया कर दिया था। एयर इंडिया की दिल्ली से कोलकाता की फ्लाइट का किराया 70 हजार से 100000 रुपए से ज्यादा हो गया था। अन्य सेक्टर्स के किराए भी आसमान चीरकर ऊपर जा पहुंचे थे। इससे मुश्किल में फंसे इंडिगो के यात्रियों के लिए और दिक्कत खड़ी हो गई। इससे पहले एयरलाइंस छुट्टियों या शादी वगैरा के सीजन में किराया बढ़ाती रही हैं, लेकिन इंडिगो के यात्रियों को राहत देने की जगह उन्होंने अपनी जेब गर्म करना शुरू कर दिया। ऐसे में मोदी सरकार को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करना पड़ा है।
दूसरी तरफ शनिवार को भी इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं। इंडिगो ने यात्रियों से माफी मांगते हुए कहा है कि 10 फरवरी तक हालात सामान्य हो जाएंगे, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब डीजीसीए ने पायलटों के लिए सिर्फ 8 घंटे की ड्यूटी का नियम तय किया, तो इंडिगो ने आखिर क्यों पहले से व्यवस्था नहीं की। इतना ही नहीं, उड़ानों पर संकट के बावजूद इंडिगो ने टिकट बेचना भी बंद नहीं किया। इससे देश के ज्यादातर एयरपोर्ट्स पर यात्रियों का रेला जुट गया। तमाम यात्री नौकरी ज्वॉइन करने, शादी में शामिल होने या बीमार परिजनों का इलाज कराने जा रहे थे। उन पर इंडिगो की उड़ान रद्द होने से बड़ी मुश्किल आ गई। रेलवे ने 37 ट्रेनों में 116 अतिरिक्त कोच लगाकर हालात को संभालने की कोशिश की, लेकिन उससे भी यात्रियों की दिक्कत कम नहीं हुई। अन्य एयरलाइंस के बढ़े किराए कोढ़ में खाज जैसे बन गए।
















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