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कांग्रेस ने चन्नी को दी तरजीह, उत्तराखंड में स्टार प्रचारकों की लिस्ट से सिद्धू का नाम गायब

नई दिल्ली। कांग्रेस ने काफी समय से मनमानी पर अड़े पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के पर कतर दिए हैं। सिद्धू के सिर्फ पर ही नहीं कतरे गए हैं, बल्कि कांग्रेस हाईकमान ने ये भी संकेतों में साफ कर दिया है कि पंजाब में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ही उसके नेता हैं। हुआ ये है कि बुधवार को कांग्रेस ने उत्तराखंड के लिए स्टार प्रचारकों की सूची जारी की। इसमें कांग्रेस के तमाम बड़े नाम हैं। खास बात ये कि लिस्ट मे चन्नी का नाम तो है, लेकिन सिद्धू का नाम गायब है। इससे पहले कांग्रेस ने जब भी किसी चुनाव में स्टार प्रचारकों की लिस्ट तैयार की, उसमें सिद्धू का नाम जरूर रहता आया है।

चन्नी का नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट में डालकर कांग्रेस ने संकेतों में ये भी बता दिया है कि पंजाब में सीएम फेस फिलहाल वही हैं। ये इससे भी पता चलता है कि चन्नी को कांग्रेस ने भदौड़ और चमकौर साहिब से टिकट दिया है। जबकि, सिद्धू सिर्फ एक सीट से लड़ रहे हैं। खास बात ये है कि स्टार प्रचारकों में गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल का भी नाम है, लेकिन सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष होने के बाद भी लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। ये इस मायने में भी खास है कि उत्तराखंड में सिखों की तादाद अच्छी खासी है और सिद्धू अच्छे वक्ता हैं और सिखों के बीच उनकी छवि अब तक किसी स्टार से कम नहीं रही है।

नवजोत सिंह सिद्धू ने बीजेपी छोड़कर साल 2017 में कांग्रेस ज्वॉइन की थी। पिछले करीब 1 साल से वो कांग्रेस आलाकमान पर दबाव डालकर अपनी मांगें मनवाते आ रहे हैं। उनके ही दबाव में कांग्रेस ने सीएम पद से कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाया। फिर चन्नी सीएम बने, तो सिद्धू का उनसे भी छत्तीस का आंकड़ा बन गया। सिद्धू लगातार सार्वजनिक तौर पर मांग करते रहे हैं कि पंजाब में कांग्रेस को सीएम फेस घोषित करना चाहिए। एक अखबार को इंटरव्यू में वो कह चुके हैं कि बिना दूल्हे के बारात का कोई मतलब नहीं होता। कल ही सिद्धू पंजाब में प्रचार छोड़कर माता वैष्णों देवी के दर्शन करने चले गए। उनकी पत्नी नवजोत कौर का बयान भी आया कि अगर हम पति-पत्नी को उचित स्थान नहीं मिला, तो हम अपने पुराने प्रोफेशन में लौट जाएंगे। इन सबके बाद कांग्रेस हाईकमान ने जिस तरह सिद्धू को स्टार प्रचारकों में शामिल नहीं किया है, उससे साफ है कि कांग्रेस अब उनकी मनमानी के दबाव में नहीं आने जा रही है।

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