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केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के खिलाफ मुकदमा, लेकिन क्या सही है शिवसैनिकों की गुंडागर्दी?

मुंबई। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने नासिक जिले में बयान दे दिया कि वह सीएम उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मार देते। ऐसा कहने पर पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस की टीम उन्हें गिरफ्तार करने रवाना कर दी गई, लेकिन साथ ही महाराष्ट्र में सरकार चला रही शिवसेना के कार्यकर्ता जगह-जगह हुड़दंग और गुंडागर्दी करने पर उतारू हो गए। सवाल ऐसे में ये है कि नारायण राणे का बयान तो गलत है ही, लेकिन शिवसैनिकों को जो करने की छूट दी जा रही है, वो कितनी जायज है ? हालत ये है कि युवा शिवसेना कार्यकर्ताओं नारायण राणे के घर के बाहर पहुंच गए। वहां राणे समर्थकों और शिवसैनिकों में जमकर पत्थर चले। पुलिस को लाठी चलानी पड़ी। बावजूद इसके गुंडागर्दी होती रही।

वहीं नासिक में बीजेपी के दफ्तर में शिवसैनिकों ने घुसकर तोड़फोड़ की। सांगली में शिवसैनिकों ने नारायण राणे के पोस्टर पर कालिख पोती है। औरंगाबाद में भी राणे के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। जबकि, चिपलूण में राणे के जन आशीर्वाद यात्रा में भी हंगामे की खबर है। कुल मिलाकर राणे के एक गलत बयान के मसले पर शिवसैनिक भी कुछ कम गलत करते नहीं दिख रहे हैं।

इससे पहले भी महाराष्ट्र की शिवसेना सरकार ने नारायण राणे के जन आशीर्वाद यात्रा को रोकने के लिए कई मुकदमे दर्ज किए थे। कोरोना नियमों के उल्लंघन और महामारी एक्ट के तहत पांच-छह जिलों में राणे और कार्यकर्ताओं के खिलाफ 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए। सवाल ये है कि जब महाराष्ट्र सरकार कह रही है कि सीएम उद्धव के खिलाफ अपशब्द इस्तेमाल करने में राणे के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी, तो फिर शिवसैनिकों को राणे और बीजेपी के खिलाफ मैदान में उतरकर हुड़दंग करने क्यों दिया जा रहा है ? यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी शिवसैनिक कई बार कानून को इसी तरह धता बताकर तोड़फोड़ करते रहे हैं।

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