नई दिल्ली। मोदी सरकार की तरफ से संसद के मौजूदा सत्र में क्रिप्टोकरेंसी के नियमन या बैन पर बिल लाए जाने के फिलहाल आसार नहीं हैं। बावजूद इसके क्रिप्टोकरेंसी बाजार में अनिश्चितता दिख रही है। इस वर्चुअल मुद्रा पर निवेशक अब भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। निवेशकों ने 11 से 17 दिसंबर के बीच क्रिप्टोकरेंसी के मार्केट से 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा निकाल लिए हैं। क्वॉइनशेयरर्स नाम के डिजिटल ऐसेट मैनेजमेंट फर्म ने बताया है कि 17 हफ्तों में पहली बार क्रिप्टोकरेंसी की जमकर बिकवाली हुई है। इससे पहले इस साल जून में निवेशकों ने 9.7 करोड़ डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी बेची थी।
हालात ये हैं कि सबसे महंगे बिटकॉइन में भी पिछले महीने भारी गिरावट का दौर देखने को मिला है। 1 बिटकॉइन की फिलहाल कीमत 69000 डॉलर से घटकर 46000 डॉलर हो गई है। 17 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते के दौरान बिटकॉइन फंड से भी निवेशकों ने 8.9 करोड़ डॉलर निकाल लिए हैं। इसी से समझा जा सकता है कि क्रिप्टोकरेंसी बाजार में किस तरह हाहाकार मचा है। भारत में क्रिप्टो का लेन-देन करने वाले निवेशकों की अनुमानित संख्या करीब 10 करोड़ है। जबसे पता चला है कि मोदी सरकार क्रिप्टो के लेन-देने को बैन कर सकती है या उसका नियमन कर सकती है, तभी से इन निवेशकों में डर बैठा हुआ है कि कहीं उनका निवेश पानी में न बह जाए।













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