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चन्नी को सीएम फेस बनाकर कांग्रेस ने पंजाब में खेला दलित कार्ड

चंडीगढ़। आखिरकार नवजोत सिंह सिद्धू को पछाड़कर चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब में कांग्रेस के सीएम फेस बन गए, लेकिन इसके साथ ही कांग्रेस के सामने अब चुनाव में जातियों के ध्रुवीकरण की मुश्किल भी आ सकती है। पंजाब में दलित वोटर तो जीत हार तय करते ही हैं, हिंदुओं और जाट सिखों की भी बड़ी संख्या है। एक दलित को सीएम फेस बनाने पर गैर दलित हिंदू और जाट सिखों में अगर नाराजगी बढ़ी, तो कांग्रेस के लिए चन्नी वाला ट्रंप कार्ड बेकार साबित हो सकता है। पंजाब में 20 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। ऐसे में पार्टी के पास गैर दलित वोटरों को साधने के लिए बहुत कम मौका भी बचा है।

पंजाब में 32 फीसदी दलित आबादी है। अब तक दलितों का वोट तो सभी लेते रहे, लेकिन पहली बार किसी दलित को राज्य के सीएम के तौर पर देखा गया है और उसे ही कांग्रेस ने सीएम फेस भी बनाया है। बीएसपी के संस्थापक दलित नेता कांशीराम खुद पंजाब के थे। बीएसपी बनाने के बाद दलित नेताओं को पंजाब की सरकारों में मंत्री पद दिए जाने लगे थे, लेकिन इस बार कांग्रेस ने जो पांसा चला है, वो फायदा भी करा सकता है और नुकसान भी। दोनों ही मामलों में कांग्रेस भाग्य भरोसे है और भाग्य का ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका पता 10 मार्च को चल सकेगा।

पंजाब विधानसभा में 117 सीटों में से 34 रिजर्व हैं। तमाम जानकारों के मुताबिक दलित वर्ग से आने वाले चन्नी को सीएम फेस बनाना कांग्रेस के लिए बैकफायर भी कर सकता है। इसकी वजह गैर दलित हिंदू और जाट सिख हैं। गैर दलित हिंदुओं का पंजाब में प्रतिशत करीब 38 फीसदी है। इसके अलावा 19 फीसदी जाट सिख वोट भी काफी अहम हो जाता है। आम आदमी पार्टी ने जाट सिख भगवंत मान को अपना सीएम प्रत्याशी बनाया है। वहीं, बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह भी जाट सिख हैं। चन्नी से सीएम फेस के मुकाबले में हारने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी जाट सिख हैं। बीते दिनों कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का एक वीडियो भी सामने आया था। इसमें जाखड़ कहते दिखे थे कि सीएम पद के चुनाव में उन्हें सबसे ज्यादा वोट मिले थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें सीएम नहीं बनाया। इस वीडियो की याद अगर गैर दलित हिंदू वोटरों को रही, तो वे भी चुनाव में गुल खिला सकते हैं।

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