नई दिल्ली। अमूमन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी न किसी मससे को लेकर दूसरे देशों के नेताओं से गुफ्तगू करते ही रहते हैं। कभी खुद जाकर मुखातिब करने की जहमत उठाते हैं, तो कभी अपने समकक्षों को फोन कर उनकी खोज-खबर ले लिया करते हैं और इसी बहाने चंद ज्वलंत मुद्दों पर थोड़ी चर्चा भी हो जाती है। इसी कड़ी में उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बेरिस जॉनसन से फोन पर बात की और खास बात यह रही कि इस वार्ता के लिए पहल भारत की तरफ से नहीं, अपितु ब्रिटेन की तरफ से की गई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई फोन पर हुई यह वार्ता इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि अभी हाल ही में ब्रिटेन ने भारत निर्मित वैक्सीन को मान्यता देने पर प्रश्न चिन्न खड़ा कर दिया था। उसने अपने निर्देश में साफ कह दिया था कि किसी भी भारतीय मुसाफिर के भारतीय वैक्सीन लगाने के बाद भी उसे ब्रिटेन पहुंचने पर 10 दिन तक एकांतवास रहना होगा, जिससे खफा हुए भारत ने ब्रिटेन निर्मित वैक्सीन पर प्रश्च चिन्न खड़ा कर दिया था जिससे बाद इसे लेकर दोनों ही देशों के बीच विवाद भी पैदा हो गया था, लेकिन बाद में ब्रिटेन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए अपने निर्देश को वापस ले लिया था।
खैर, इस पूरे प्रकरण के बाद आज जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की तरफ से पीएम मोदी से वार्ता करने की पहल की गई, तो इसे लेकर कयासबाजी अपने चरम पर पहुंच गई कि आखिर किन मसलों पर दोनों ही नेताओं की बीच वार्ता होगी। सवाल उठे कि क्या हाल ही में ब्रिटेन में भारत निर्मित वैक्सीन पर प्रश्न चिन्ह उठाए हैं, उसे लेकर वार्ता होगी? क्या अफगानिस्तान मुद्दे पर वार्ता होगी? क्या चीन के साथ चल रहे तनाव पर वार्ता होगी? क्या पाकिस्तान द्वारा आतंकी गतिविधियों को पोषित करने पर विराम लगाने की दिशा में वार्ता होगी? क्या जलवायु परिवर्तन पर वार्ता होगी? क्या पाकिस्तान द्वारा तालिबान को समर्थन देने पर वार्ता होगी? और यकीन मानिए, जब दोनों ही नेताओं के बीच वार्ता का सिलसिला शुरू हुआ, तो हुआ भी कुछ ऐसा ही, दोनों ही नेताओं के बीच हुई वार्ता में इनमे से अधिकांश मसले वार्ता के केंद्र में रहे। हां…इतना जरूर था, कि इनमे से काफी मसले पीछे भी छूट गए।
इन मुद्दों पर हुई वार्ता
यहा हम आपको बताते चले कि दोनों शीर्ष स्तर के नेताओं के बीच हुई इस वार्ता में इन उक्त मुद्दों का जिक्र तो हुआ ही, लेकिन वार्ता के केंद्र में रहा अफगानिस्तान में तालिबान का राज। दोनों ही नेताओं की वार्ता में तालिबान का मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहा। दोनों ही नेताओं ने तालिबान को सबक सिखाने की दिशा में पूरा खाका तैयार करने की बात कही। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में दोनों के पारस्परिक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय ताल्लुकात, रक्षात्मक संबंध कई मसलों पर वार्ता हुई। आने वाले दिनों में इन वार्ता के नतीजे देखने को मिलेंगे। वहीं अगर दोनों ही देशों के संबंधों की बात करें, तो शुरू से ही दोनों ही देशों के बीच रणनीतिक रूप से रिश्ते काफी मजबूत रहे हैं, जिनका फायदा दोनों को मिलता रहा है। अब ऐसे में इस वार्ता के नतीजों का असर दोनों देशों के रिश्तों पर कैसा पड़ता है। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा।













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