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धर्मनिरपेक्षता का मतलब अपना धर्म भूल जाना नहीं होता: तेजस्वी के तंज पर BJP नेता का प्रहार

नई दिल्ली। हमारे देश में प्रतीकों, चिह्नों को लेकर राजनीति का जो दौर शुरू हुआ है, वह अब फैलता ही जा रहा है। कुछ दिन पहले कर्नाटक में हिजाब विवाद, उससे पहले विभिन्न शख्सियतों के मूर्तियों को लेकर सियासत, और अब बिहार में शताब्दी स्मृति स्तंभ को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। गौरतलब है कि ‘शताब्दी स्मृति स्तंभ’ एक निर्माणाधीन स्तंभ है, जिसका निर्माण बिहार विधानसभा के शताब्दी समारोह को यादगार बनाने के लिए विधानसभा के मुख्य द्वार के ठीक सामने किया जा रहा है। इसी स्तंभ के लोकार्पण के लिए लोकसभाध्यक्ष ओम बिड़ला भी गुरुवार को पटना पहुंचे थे। बिहार के विधानसभा परिसर में निर्माण हो रहे इस स्तंभ को लेकर अब विवाद शुरू हो गया है, जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसको लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस स्तंभ में जड़े स्वास्तिक चिह्न को लेकर प्रश्न खड़ा किया है, और नीतीश कुमार को निशाने पर लेने की कोशिश की है। तेजस्वी के इस आरोप पर कांंग्रेस ने भी उनका समर्थन किया है।

‘आजादी के बाद ऐसा पहला स्तंभ जिसमें अशोक चक्र की जगह स्वास्तिक’- तेजस्वी

तेजस्वी के कार्यालय के ट्विटर हैंडल से इसको लेकर एक ट्वीट किया गया, जिसमें लिखा गया है कि- ‘आजादी के बाद देश का यह प्रथम ऐसा स्तम्भ होगा जिसमें अशोक चक्र नहीं है। नीतीश सरकार ने देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को ध्वस्त करते हुए अशोक चक्र की जगह स्वास्तिक चिन्ह लगाया है।‘ इस ट्वीट के बाद बहस का अब एक नया दौर शुरू हो गया है।

हालांकि देखा जाए तो प्रतीक की राजनीति के इस दौर में पार्टियां बिना सोचे-समझे भी मुद्दा खड़ा करने की कोशिश करती हैं। स्वास्तिक का चिह्न केवल नाजियों के लिए ही आरक्षित नहीं है, जैसा कि आरजेडी ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से बताने की कोशिश की है।

‘धर्मनिरपेक्षता का मतलब अपने धर्म को भूल जाना नहीं होता’- बिहार विस अध्यक्ष

बिहार विधानसभाध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने तेजस्वी के इस आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी के समझ पर सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी में समझ का अभाव है, अगर किसी चीज के बारे में उन्हें जानकारी नहीं तो जानकारी ले लेनी चाहिए। स्वास्तिक का चिह्न तो बिहार के राजकीय चिह्न में भी शामिल है। ये कोई नया थोड़े ही है। इसके अलावा तमाम विधायकों के लेटर पैड पर भी यह चिह्न अंकित है, खुद तेजस्वी के लेटर पैड पर यह मौजूद है। धर्मनिरपेक्षता का मतलब यह नहीं होता कि अपने धर्म और प्रतीक चिह्नों को भूल जाया जाए।

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