नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में ATS को बड़ी कामयाबी मिली है। बता दें कि धर्म परिवर्तन कराने वाले दो मालानाओं को यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किया है। इन मौलानाओं पर आरोप है कि ये लोग धर्म परिवर्तन कराने के एक रैकेट चलाते थे और इन्होंने करीब 1000 से ज्यादा लोगों का धर्म परिवर्तन कराया था। वहीं अब धर्मांतरण मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने मामले में आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। साथ ही सीएम योगी ने आरोपियों की प्रॉपर्टी जब्त करने के भी आदेश दिए हैं। बता दें कि यूपी एटीएस की टीम ने सोमवार को गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मुफ्ती काजी जहांगीर, मोहम्मद उमर गौतम को गिरफ्तार किया था। दोनों दिल्ली के जामिया नगर के रहने वाले है।
बता दें कि इन आरोपियों को लेकर जानकारी सामने आई है कि इन लोगों के तार डासना मंदिर के पुजारी पर हमला करने की साजिश रचने वालों से भी जुड़े हैं। दरअसल, डासना मंदिर के पुजारी पर हमले की साजिश रचने वाले काशिफ और रमजान के तार सलीमुद्दीन से जुड़े पाए गए हैं, तो वहीं नोएडा में एटीएस द्वारा पकड़े गए धर्मांतरण के दोनों आरोपियों के तार भी सलीमुद्दीन से जुड़े हैं। बता दें कि सलीमुद्दीन, डासना देवी मंदिर में साले कासिफ के साथ घुसे नागपुर निवासी विपुल विजयवर्गीय का गुरु है।
2015 में सलीमुद्दीन ने ही विपुल विजयवर्गी का धर्म परिवर्तन कराया था। धर्म बदलने के बाद उसे रमजान नाम दिया था। इसके बाद 2019 में रमजान की शादी कासिफ की बहन से कराई थी। बता दें कि सलीमुद्दीन विजय नगर के सेक्टर 12 का रहने वाला है। वहीं सलीमुद्दीन की गिरफ्तारी काशीपुर रमजान से पूछताछ में हुए खुलासे के बाद हुई थी। ऐसे में अब पता चला है कि, सलीमुद्दीन के तार धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में गिरफ्तार हुए उमर गौतम के साथ भी जुड़े हैं।
वहीं गिफ्तार हुए दोनों मौलानाओं पर जानकारी देते हुए यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि राज्य में एक रैकेट चल रहा है, जो लोगों को इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर कर रहा है। कुमार ने इसकी पुष्टि की है कि अब तक लगभग 1000 लोगों ने अपना धर्म परिवर्तित कर लिया है। एडीजी ने आगे कहा कि ये दोनों लोग गरीब परिवारों, बेरोजगार युवाओं और विकलांगों को निशाना बनाते थे, खासकर जो सुनने और बोलने में अक्षम थे, उनको अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर करते थे।



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