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नाकामी के झटकों से परेशान कांग्रेस को अब इस शख्स में दिख रही उम्मीद, राहुल और प्रियंका ने की मुलाकात

नई दिल्ली। एक तरफ कांग्रेस है। दूसरी तरफ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर यानी पीके। दोनों एक ही समस्या का सामना कर रहे हैं। ये समस्या है पहचान खोने की। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के सामने पहचान का संकट और बढ़ गया है। वो अब सिर्फ 2 राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अकेले दम पर सरकार में है। वहीं, प्रशांत किशोर बीजेपी से शुरू करके टीएमसी तक घाट-घाट का पानी पीने के बाद खाली हैं। ऐसे में कांग्रेस और पीके को एक-दूसरे में सहारा नजर आ रहा है। दोनों करीब आने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि पहचान का ये संकट किसी तरह खत्म हो सके।

पहचान के इस संकट को खत्म करने के लिए प्रशांत किशोर और कांग्रेस आलाकमान ने फिर गलबहियां करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक हाल ही में पीके ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की है। ये मुलाकात इस मायने में भी खास है क्योंकि प्रशांत को हाल ही में तृणमूल कांग्रेस TMC की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी टा-टा, बाय-बाय कह दिया है। वहीं, कांग्रेस पंजाब की सत्ता गंवा चुकी है और उसका ब्रह्मास्त्र मानी वाली प्रियंका गांधी का ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा भी यूपी में टांय-टांय फिस हो चुका है।

पहले बात प्रशांत किशोर की कर लेते हैं। साल 2014 में नरेंद्र मोदी का कैंपेन चलाकर प्रशांत किशोर चर्चा में आए। फिर बीजेपी से दूरी बढ़ी, तो उस वक्त बीजेपी से नाराज बिहार के सीएम नीतीश कुमार के साथ चले गए। वहां से भी प्रशांत की पतंग कटी, तो वो पंजाब जाकर तब के सीएम कैप्टन अमरिंदर के साथ हो गए। फिर अमरिंदर का साथ छूटा, तो वो कांग्रेस के साथ जुड़ने की कोशिश में रहे, लेकिन नाकाम रहने पर ममता बनर्जी के साथ गए। वहां से भी पत्ता साफ होने पर फिर कांग्रेस के दरवाजे में दस्तक दे रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने जेएनयू की कम्युनिस्ट ब्रिगेड पर भरोसा कर उसे आगे बढ़ाया। अपने पुराने नेताओं को जेएनयू ब्रिगेड के कहने पर हाशिए पर पहुंचाया और खुद लकीर का फकीर बन गई। अब इस गैंग से पीछा छुड़ाने के लिए कांग्रेस पीके पर भरोसा जताने की तैयारी में जुटती दिख रही है।

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