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पीएम मोदी की 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग बैठक, सियासी गलियारों में हलचल हुई तेज

नई दिल्ली। जब कभी-भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई बड़ी बैठक करते हैं, तो सियासी गलियारों में सभी के कान खड़े हो जाते हैं। आखिर हो क्यों ना। इतिहास गवाह है कि जब कभी-भी प्रधानमंत्री ने कोई बैठक की है, तो अपने ऐतिहासिक फैसले से इतिहास रच दिया है। नोटबंदी, जीएसटी समेत न जाने कितने ही ऐसे फैसले रहे हैं, जिन्हें लेने से पहले उन्होंने बैठक की है, लिहाजा जब कभी-भी वे कोई बैठक करते हैं, तो सियासी गलियारों में मौजूदा लोगों की सियासी सक्रियता अपने चरम पर पहुंच जाती है। कुछ ऐसी ही सियासी सक्रियता अभी सियासी गलियारों में मौजूदा लोगों में देखने को मिल रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक नहीं, दो नहीं, तीन भी नहीं, बल्कि 12 राज्यों और सात केंद्र शाषित प्रदेशों के रहनुमाओं (मुख्यमंत्रियों) संग बैठक कर रहे हैं और इस बैठक की खास बात ये है कि इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद हैं।

सूत्रों की मानें तो ये बैठक पिछले साल ही होनी थी, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर की दस्तक ने सरकार द्वारा निर्धारित कार्यक्रमों की रूपरेखा को ध्वस्त करके रख दिया, जिसके परिणामस्वरूप बाध्य होकर यह बैठक टालनी पड़ गई। अब जब कोरोना से काफी हद तक हालात दुरूस्त हो चुके हैं, तो सरकार ने यह बैठक करने का मन बनाया है। वो भी 12 राज्यों के बीजेपी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों संग।

ऐसी स्थिति में लोगों के जेहन में मसलों को जानने की आतुरता का अपने चरम पर पहुंचना लाजिमी है। लेकिन अभी तक ऐसी कोई खबर निकलकर सामने नहीं आई है, जिससे यह जाहिर हो सकें कि किन मसलों पर मंत्रणा का सिलसिला जारी है। उधर, गौर करने वाली बात यह कि यह बैठक ऐसे वक्त में होने जा रही है, जब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनावी बिगुल बजने वाला है, तो वहीं सीमा पर कल ही आतंकियों ने हमारे जवानों पर हमला भी किया है, जिसमें हमारे 2 जवानों की मौत हो गई, तो 12 अन्य घायल हो गएं।

उधर, सीसीडएस बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश को लेकर भी भारतीय वायुसेना की तरफ तफ्तीश का फरमान जारी किया जा चुका है। उधर, विपक्षी कुनबों ने भी केंद्र  सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है।  ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 12 राज्यों के सीएम साथ होने जा रही बैठक को एक नहीं, बल्कि कई चशमों से देखा जा रहा है। अब ऐसे में देखना होगा कि आगे चलकर इस बैठक के दरम्यान किन मसलों पर गहन चर्चा होती है और आगे क्या फैसला लिया जाता है। अभी तो फिलहाल सुगबुगाहटों का दौर ही जारी है, ऐसे में कुछ भी अंतिम तौर पर कहना मुश्किल है।

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