नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि मंदिरों में जमा धन भगवान का है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि मंदिर में जमा धन को किसी भी हालत में आर्थिक संकट से जूझ रहे सहकारी बैंकों को सहारा देने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। मामला केरल का है। वहां के पांच सहकारी बैंकों को अब मंदिर की फिक्स्ड डिपॉजिट की राशि लौटानी होगी। मंदिर का प्रबंधन करने वाले बोर्ड ने कहा है कि ये धन मिलने पर उसे वो अब सरकारी बैंक में जमा करेगा। सीजेआई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि मंदिर का धन बचाना, सुरक्षित रखना और मंदिर के हित में ही खर्च होना चाहिए।
सीजेआई ने साफ कहा कि बैंक अपनी दुकान चलाने के लिए मंदिर के जमा धन पर निर्भर नहीं हो सकते। केरल के थिरुनेल्ली सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक, सुशीला गोपालन स्मारक वनिता को-ऑपरेटिव सोसायटी, माणंठवाड़ी को-ऑपरेटिव रूरल सोसायटी, माणंठवाड़ी को-ऑपरेटिव अर्बन सोसायटी और वायनाड टेंपल एंप्लाइज को-ऑपरेटिव सोसायटी ने केरल हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। केरल हाईकोर्ट ने इन सभी को थिरुनेल्ली देवस्वोम बोर्ड की फिक्स्ड डिपॉजिट की रकम तुरंत लौटाने का आदेश दिया था। मंदिर बोर्ड चाहता है कि रकम को सरकारी बैंक में रखा जाए, लेकिन सहकारी बैंकों ने एफडी मैच्योर होने के बावजूद रकम नहीं दी।
इसकी शिकायत देवस्वोम बोर्ड ने केरल हाईकोर्ट से की थी। केरल हाईकोर्ट ने उपरोक्त सभी बैंकों को दो महीने में रकम लौटाने का आदेश दिया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सीजेआई की बेंच ने जब देखा कि सहकारी बैंक वित्तीय संकट का हवाला देकर मंदिर की रकम रोक रहे हैं, तो उन्होंने फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल पूछा कि आप मंदिर का पैसा बैंक बचाने में क्यों लगाना चाहते हैं? बेंच ने कहा कि जब सहकारी बैंक मुश्किल में हैं, तो मंदिर का पैसा सरकारी बैंकों में क्यों नहीं जाएगा, जहां वो सुरक्षित भी रहेगा और ज्यादा ब्याज भी मिलेगा? सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि बैंक को अपनी विश्वसनीयता खुद बनानी चाहिए।
















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