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मनमानी पर उतारू है केजरीवाल सरकार, दिल्ली में कमी थी फिर भी बेच दी बिजली

नई दिल्ली। राजनीति में सभी दल एक-दूसरे का विरोध करते हैं, लेकिन दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का विरोध करने में राजधानी के लोगों के हित का ध्यान भी नहीं रखा है। ताजा मामला बिजली का है। दिल्ली में बिजली उत्पादन की क्षमता कम है। कई जगह पावर कट हो रहे हैं, लेकिन आम लोगों को पावर कट से निजात दिलाने की जगह केजरीवाल सरकार बिजली बेच रही हैं।

यह खुलासा दो पावर एक्सचेंज के आंकड़ों से हुआ है। मामला इसी 20 अक्टूबर का है। उस तारीख को केजरीवाल सरकार ने एक्सचेंज को 635 मेगावाट बिजली बेच दी। जबकि, बिजली का उत्पादन ही तय सीमा से कम था। दिल्ली के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ ने भी बिजली बेची। हालांकि, इन तीनों राज्यों में बिजली का भरपूर उत्पादन होता है। इसी महीने की शुरुआत में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने सभी राज्यों को कहा था कि वे पहले अपने यहां बिजली की कमी न होने दें और सभी को बिजली देने के बाद जो बिजली बचे, उसे ही एक्सचेंज में बेचें। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक दिल्ली जैसे राज्य वैसे तो कम बिजली का रोना रो रहे हैं, लेकिन पैसा कमाने के लिए कम उत्पादन के बावजूद बिजली बेच रहे हैं।

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक यूपी और हिमाचल के बाद सबसे ज्यादा बिजली दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने बेची है। देशभर की बात करें, तो बिजली बेचने में दिल्ली का सातवां नंबर है। यही दिल्ली की सरकार है, जिसने बीते दिनों कोयले की कमी का रोना रोया और बिजली की कमी की बात कही थी। जबकि, बाद में पता चला कि केजरीवाल ने खुद ट्वीट करके बताया था कि दिल्ली में कोयले से चलने वाला कोई बिजली संयंत्र है ही नहीं। अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक बिजली बेचने वाले राज्य पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, तेलंगाना, केरल, दिल्ली और हिमाचल हैं।

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