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डिजिटल अरेस्ट की वारदात रोकने के लिए मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगा और वक्त

नई दिल्ली। डिजिटल अरेस्ट कर लोगों के बैंक खाते खाली करने के वारदात आए दिन होते हैं। ठगों के हाथ डिजिटल अरेस्ट होकर रकम गंवाने वाले एक शख्स की चिट्ठी पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर इस मामले में सुनवाई शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट की वारदात रोकने के लिए केंद्र की मोदी सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार ने डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट के मामलों में नई एफआईआर दर्ज कर जांच भी शुरू की है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों से निपटने के लिए ठोस योजना बनाने में वक्त लगेगा। इस वास्ते उसने सुप्रीम कोर्ट से एक महीने का समय मांगा है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर केंद्र सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट में ये भी बताया है कि गृह मंत्रालय ने ऐसे वारदात से निपटने के लिए उच्चस्तरीय अंतर विभागीय समिति बनाई है। डिजिटल अरेस्ट की वारदात रोकने के लिए ये समिति आम लोगों से मिले सुझावों पर भी विचार कर रही है।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच डिजिटल अरेस्ट के मामले की सुनवाई कर रही है। नवंबर 2025 में हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुपरीम कोर्ट को बताया था कि डिजिटल अरेस्ट कर भारतीयों से ही सिर्फ 3000 करोड़ की धोखाधड़ी की जा चुकी है। पीड़ितों में ज्यादातर बुजुर्ग हैं। इस पर तब जस्टिस रहे और अब सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि अगर डिजिटल अरेस्ट की समस्या की तरफ आंखें मूंदकर बैठे या उनके सामने झुके और सख्त आदेश न दिए, तो समस्या और बढ़ेगी। कोर्ट ने कहा कि हम सख्त हाथों से डिजिटल अरेस्ट की समस्या से निपटना चाहते हैं। हरियाणा के अंबाला में रहने वाले बुजुर्ग दंपति की चिट्ठी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में खुद संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। दंपति को डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर ठगों ने 1 करोड़ रुपए ले लिए।

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