नई दिल्ली। होलसेल प्राइज इंडेक्स (WPI) यानी थोक महंगाई दर में दिसंबर 2025 में बड़ी उछाल आई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों को देखें, तो दिसंबर में थोक महंगाई दर बढ़कर 0.83 फीसदी हो गई। ये बीते आठ महीनों में सबसे ज्यादा है। नवंबर में थोक महंगाई दर माइनस 0.32 फीसदी हो गई थी। दिसंबर में थोक मुद्रास्फीति दर के पॉजिटिव होने की मुख्य वजह विनिर्माण, खनिजों और खाने-पीने की चीजों की कीमत में आया बदलाव है। वहीं, खुदरा महंगाई दर में भी बढ़ोतरी हुई है।
सरकार ने बताया है कि विनिर्मित चीजों की श्रेणी में महंगाई की दर 1.82 फीसदी हुई है। जबकि, नवंबर 2025 में ये 1.33 फीसदी थी। इस श्रेणी में महंगाई बढ़ने की वजह मशीनरी, उपकरण, कपड़ा और अन्य चीजों की कीमत का बढ़ना रहा। खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई दर दिसंबर 2025 में शून्य रही। जबकि, नवंबर में इन चीजों की कीमत में 2.60 फीसदी गिरावट आई थी। वहीं, प्राथमिक चीजों की महंगाई की दर दिसंबर में 0.21 फीसदी हो गई। नवंबर में इस श्रेणी की थोक महंगाई दर माइनस 2.93 फीसदी थी। सब्जियों की कीमत में बीते साल के मुकाबले 3.5 फीसदी महंगाई घटी। नवंबर में सब्जियों की थोक महंगाई दर में 20.23 फीसदी गिरावट आई थी।
थोक महंगाई दर के आंकड़े बता रहे हैं कि प्याज की कीमत दिसंबर में गिरकर 54.40 फीसदी हुई। जबकि, नवंबर 2025 में प्याज की कीमत 64.70 फीसदी थी। आलू की कीमत में 38.21 फीसदी का संकुचन आया। दालों की कीमत में भी 13.88 फीसदी का संकुचन आया। वहीं, दूध की कीमत में इससे पहले के साल के मुकाबले 3.23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। दिसंबर में खुदरा महंगाई दर भी बढ़कर 1.3 फीसदी हो गई। जबकि, नवंबर 2025 में खुदरा महंगाई दर 0.7 फीसदी थी। रिजर्व बैंक और केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने खुदरा महंगाई की दर के लिए 4 फीसदी का लक्ष्य तय किया हुआ है। इस तरह खुदरा महंगाई अभी काफी कम है। रिजर्व बैंक ने महंगाई को थामने के लिए 2022 से लगातार रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी। फिर महंगाई कम होने पर रेपो रेट में कटौती कर इसे अब रिजर्व बैंक 5.25 फीसदी पर लाया है। फिलहाल खुदरा महंगाई दर बढ़ने का आपकी जेब पर असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि रोजमर्रा जरूरत की चीजों की कीमत अब भी काफी कम है।

















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