नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का आज स्थापना दिवस है। आरएसएस की स्थापना को 100 साल पूरे हो चुके हैं। इस बार भी विजयदशमी पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में संगठन के बड़े कार्यक्रम को संबोधित किया। इस बार कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शामिल हुए। अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने पहलगाम में आतंकी हमले का उल्लेख किया। उन्होंने इसके जवाब में सेना के पराक्रम की प्रशंसा की। साथ ही मोहन भागवत ने कहा कि देश में भी असंवैधानिक तत्व हैं, जो देश को अस्थिर करने की कोशिश करते हैं।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ का भी अपने संबोधन में उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस कदम से सभी को दिक्कत हो रही है। बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल का नाम लिए बिना इन देशों में सरकार के खिलाफ जनता के आंदोलन के बारे में भी मोहन भागवत ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जब जनता से सरकार दूर रहती है, उनकी दिक्कतों को नहीं जानती और जनहित में नीतियां नहीं बनाती, तो लोग सरकार के खिलाफ होते हैं। मोहन भागवत ने कहा कि अपनी नाखुशी जाहिर करने के लिए हिंसा का तरीका इस्तेमाल करने से किसी को फायदा नहीं होता। इससे दूसरे देशों में बैठी ताकतों को खेलने का मंच जरूर मिल जाता है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में प्राकृतिक आपदाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भूस्खलन और लगातार बारिश आम बात हो गई है। प्राकृतिक आपदाएं बढ़ गई हैं। मोहन भागवत ने कहा कि पिछले तीन-चार साल से ऐसा देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमालय हमारी सुरक्षा की दीवार और दक्षिण एशिया का जल स्रोत है। अगर विकास के अभी के तरीके आपदाओं को बढ़ावा देते हैं, तो हमें फैसलों पर फिर से विचार करना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हिमालय की मौजूदा हालत खतरे की घंटी बजा रही है।

















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