नागपुर। नीट-यूजी परीक्षा देने वाली एक छात्रा पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने 25000 रुपए का जुर्माना लगाया है। इस छात्रा ने नीट-यूजी में अंकों के बारे में झूठा दावा किया था। छात्रा का झूठ ओएमआर शीट की जांच से पता चला। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने भी नीट-यूजी छात्रों के तीन झूठे दावों पर पांच-पांच हजार रुपए जुर्माना लगाया था। बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने छात्रा के आचरण को दोषपूर्ण बताते हुए याचिका खारिज कर दी।
नीट-यूजी देने वाली छात्रा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि परीक्षा में उसे 720 में से 680 अंक मिलने चाहिए थे। उसका कहना था कि सिर्फ 160 अंक दिए गए। छात्रा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में नीट-यूजी कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर ठीक से जिम्मेदारी न निभाने और मूल्यांकन में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाया था। छात्रा की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस रजनीश व्यास ने सुनवाई की। दो जजों की बेंच ने एनटीए से कहा कि वो छात्रा की नीट-यूजी परीक्षा की मूल ओएमआर शीट पेश करे।
एनटीए ने इस पर कोर्ट में छात्रा की ओएमआर शीट पेश की। इस ओएमआर शीट की बारीकी से जांच हुई। छात्रा को जब ये शीट दिखाई गई, तो उसने कोर्ट में मान लिया कि उसके दावे में सच्चाई नहीं और सही में 160 अंक ही मिले है। छात्रा की ओर से अपना दावा झूठा कहे जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि इस तरह के व्यवहार को माफ नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि नीट-यूजी देने वाली छात्रा के झूठे दावे की वजह से सरकारी तंत्र को गैरजरूरी प्रशासनिक जांच और कागजी कार्रवाई करनी पड़ी। बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने इसके बाद छात्रा पर 50000 रुपए का जुर्माना लगाने पर विचार किया, लेकिन फिर नरमी बरतते हुए जुर्माने को 25000 रुपए कर दिया।
