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Maa Annapoorna: PM मोदी की पहल का असर, कनाडा सरकार ने लौटाई 100 साल पहले चुराई गई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति

नई दिल्ली। भारत से बरसों पहले चोरी हुईं मूर्तियां अब भारत लाई जा रही है। अपने अमेरिकी दौरे पर गए पीएम मोदी हाल ही में भारत की 157 पुरातत्व मूर्तियां वापिस स्वदेश लाए थे। वहीं अब 100 साल पहले यूपी के वाराणसी से चोरी की गई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति आज वापिस उत्तर प्रदेश पहुंचा दी गई है। प्रदेश के गृह विभाग को यह मूर्ति सौंप दी गई है। इस बारे में बात करते हुए प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, अवनीश के अवस्थी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज, मां अन्नपूर्णा की मूर्ति को उत्तर प्रदेश लाया जाएगा। हमारी राज्य सरकार चार दिवसीय मां अन्नपूर्णा देवी यात्रा वाराणसी ले जाएगी। 15 नवंबर को काशी विश्वनाथ मंदिर में इस मूर्ति की स्थापना की जाएगी। बता दें कि मीनाक्षी लेखी ने आज दिल्ली के नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में पूजा-अर्चना की।

100 साल पहले चोरी हुई थी मूर्ति

बताया गया है कि लगभग 100 साल पहले यह मूर्ति वाराणसी से चोरी कर कनाडा ले जाई गई थी। वहीं अब यह मूर्ति हाल ही में भारत लाई गई है। विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली में बताया कि यह मूर्ति 15 नवंबर को काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित की जाएगी।

14 नवंबर को अयोध्या पहुंचेगी मूर्ति

बता दें कि चार दिवसीय इस यात्रा के पहले दिन मूर्ति को अब दिल्ली से अलीगढ़ ले जाया जाएगा। वहीं 12 नवंबर को कन्नौज ले जाया जाएगा, कहा जा रहा है कि 14 नवंबर को यह मूर्ति अयोध्या पहुंचाई जाएगी। आखिर में यह मूर्ति 15 नवंबर को वाराणसी पहुंच जाएगी, जहां उचित अनुष्ठान के बाद यह मूर्ति काशी विश्वनाथ मंदिर में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 15 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के शुभ अवसर पर विश्वनाथ मंदिर में इस प्रतिमा का अभिषेक करेंगे।

पीएम मोदी भी अमेरिका से लाए भारतीय पुरातत्व

गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिका द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सौंपी गईं थी। इस दौरान पीएम मोदी 157 मूर्तियां वापिस भारत ला थे। जिनका एएसआइ को बेसब्री से इंतजार था। इस मामले में एएसआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि जो मूर्तियां भारत लाई गई, इनकी कीमत नहीं आंकी जा सकती है, ये अमूल्य हैं। उन्होंने बताया कि मूर्ति तस्कर सुभाष कपूर द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों से चोरी कर इन्हें अमेरिका में बेच दिया गया था। इनमें से कौन सी मूर्ति अपने देश से कब और कहां से चोरी हुई है, इसके बारे में किसी तरह को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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