तरुण तेजपाल को जाना ही पड़ेगा जेल, दो सप्ताह में सरेंडर का सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
नई दिल्ली। तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जाने के मामले में शीर्ष अदालत ने उनको फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने उनको दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने और सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करने का आदेश दिया है। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को उनकी जूनियर सहयोगी के रेप के आरोप में 6 अगस्त को 10 साल जेल की सजा सुनाई थी और सरेंडर के लिए चार हफ्ते का समय दिया था।
तरुण तेजपाल ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि पहले उनको सरेंडर करना होगा उसके बाद उनकी याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। अदालत ने कहा कि अगर तरुण तेजपाल का सरेंडर सर्टिफिकेट 22 सितंबर या उससे पहले जमा कर दिया जाता है तो उनकी याचिका को 22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अमन लेखी ने कोर्ट में उनका पक्ष रखा। जबकि गोवा पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।
यह साल 2013 का मामला है। तरुण तेजपाल पर उनकी एक पूर्व सहयोगी ने आरोप लगाया था कि नवंबर 2013 में गोवा में थिंकफेस्ट ईवेंट के दौरान होटल की लिफ्ट में उसका यौन उत्पीड़न किया था। यह केस की सुनवाई गोवा की मापुसा कोर्ट में साल 2017 से 2021 तक चली और वहां से तरुण तेजपाल बरी हो गए थे। इसके बाद निचली अदालत के फैसले को गोवा पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उनको दोषी करार देते हुए सजा सुना दी। सजा का ऐलान होने के बाद तरुण तेजपाल ने अपनी 62 साल की उम्र का हवाला देते हुए कहा था कि मेरा मानना है कि मैं पीड़ित हूं।
