ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कर्मचारियों के बकाया डीए के 25 फीसदी का मार्च तक भुगतान का आदेश
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के लगभग 20 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही राहत भरा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार को आदेश दिया है कि वो सरकारी कर्मचारियों का साल 2009 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता (डीए) जारी करे। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने अपने आदेश में राज्य सरकार को डीए के कुल बकाए के 25 फीसदी का भुगतान अनिवार्य रूप से 6 मार्च 2026 तक करने को कहा है।
अदालत ने डीए की शेष 75 फीसदी राशि के भुगतान की प्रक्रिया और समय सीमा निर्धारित करने के लिए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाने का आदेश दिया है। बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व टीएमसी सरकार ने डीए नियमों में बदलाव कर दिया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मनमाना करार दिया। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने मई 2022 में इस मामले में आदेश दिया था कि तीन महीने के भीतर कर्मचारियों को डीए का भुगतान किया जाए। हाईकोर्ट के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बंगाल सरकार के अनुमान के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट इस आदेश के बाद उसे करीब 43 हजार करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
उधर, बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, ममता बनर्जी सरकार वैध डीए बकाया का भुगतान करने में लगातार आनाकानी करती रही। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य सरकार की अपने ही कर्मचारियों के प्रति उदासीनता को उजागर करता है और न्याय और जवाबदेही की एक बड़ी जीत है। यह बीजेपी बंगाल के लिए भी एक बड़ी जीत है, जो हर कदम पर राज्य सरकार के कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ी रही और श्रमिकों के लिए निष्पक्षता और सम्मान की लगातार आवाज उठाती रही।
