पीएफ कवरेज की मासिक वेतन सीमा 15,000 से बढ़कर हुई 25,000, केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी
नई दिल्ली। विश्वकर्मा जयंती से एक दिन पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देशभर के प्राइवेट सेक्टर के नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने कर्मचारियों के मौजूदा प्रोविडेंट फंड (पीएफ) कवरेज की मासिक वेतन सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने को मंजूरी दे दी है। नए नियम के तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए 25,000 रुपये या उससे कम है तो उसकी नियोक्ता कंपनी को उसे ईपीएफ के दायरे में शामिल करना अनिवार्य होगा और हर उस नौकरीपेशा को पीएफ का लाभ मिल सकेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोदी कैबिनेट में लिए गए इस फैसले के संबंध में जानकारी दी। इससे लगभग 51 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा, खासकर जिनकी सैलरी 15,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच है और अब वे पीएफ के बदले हुए नियमों के दायरे में आ जाएंगे। इससे भारत सरकार का अनुमानित सालाना खर्च 11,339 करोड़ रुपये होगा। पीएफ में जो कॉन्ट्रिब्यूशन होता है उसमें एक हिस्सा एम्प्लॉई का, एक एम्प्लॉयर का और एक सरकार का होता है। सरकार जो पैसा देती है वो कर्मचारियों के ईपीएफओ में जुड़ता है। इससे प्राइवेट सेक्टर के ज्यादा कर्मचारी पीएफ के दायरे में आएंगे और उनको इसका लाभ मिल सकेगा। 15000 की सैलरी लिमिट सितंबर 2014 में तय की गई थी और सितंबर 2026 में इसमें बदलाव किया गया है। अब पीएफ के लिए सैलरी सीलिंग को बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया है।
सरकार के इस फैसले से अब ज्यादा कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के तहत नियमित बचत का लाभ उठा सकेंगे। कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के जरिए रिटायरमेंट के बाद पेंशन सुरक्षा के लाभ के दायरे में अब और कर्मचारी भी आ सकेंगे। साथ ही साथ कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (EDLI) के तहत कर्मचारियों को बीमा सुरक्षा भी मिलेगी। हालांकि ऐसे कर्मचारी जिनकी बेसिक सैलरी और डीए 25,000 रुपये से ज्यादा है और वह पहले से ईपीएफ के सदस्य नहीं है, तो उनके पास इसे लेने या नहीं लेने का विकल्प रहेगा।
