कांग्रेस पर गांधी परिवार की मुखियागीरी को पहली बार सीधी चुनौती, मनीष तिवारी ने कहा- हम भी किराएदार नहीं, बहाया है खून
लुधियाना। कांग्रेस पर गांधी परिवार की दावेदारी को अब असंतुष्ट नेताओं से खुली चुनौती मिलने लगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने गांधी परिवार पर सवाल दागा है। उन्होंने कहा है कि हम कांग्रेस में किराएदार नहीं, हिस्सेदार हैं। एएनआई से बातचीत में मनीष ने कहा कि कोई धक्का देकर निकाल दे, तो दूसरी बात है। उन्होंने कहा कि हमने अपनी जिंदगी के 40 साल पार्टी को दिए हैं। खास बात ये है कि मनीष तिवारी ने गांधी परिवार के उन दावों को भी चुनौती दी कि इंदिरा और राजीव गांधी ने देश के लिए जान दी। मनीष ने इस पर कहा है कि उनके परिवार ने भी पार्टी के लिए खून बहाया है।
मनीष तिवारी पहले भी गांधी परिवार पर कई बार निशाना साध चुके हैं। मनीष ने बीते दिनों कांग्रेस के नेतृत्व के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े किए थे। इसी से नाराज होकर मनीष को कांग्रेस ने पंजाब में चुनाव के दौरान अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल नहीं किया था। वहीं, दो दिन पहले पंजाब से ही कांग्रेस के एक और बड़े नेता और पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया था। अश्विनी ने भी कहा कि कांग्रेस अपनी दुर्गति की ओर बढ़ रही है। कांग्रेस से इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद के अलावा आरपीएन सिंह जैसे बड़े नेता अलग होकर बीजेपी में जा चुके हैं।
कांग्रेस नेतृत्व यानी गांधी परिवार पर सबसे पहले 23 नेताओं के समूह ने सवाल खड़े किए थे। साल 2014 और फिर साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की दुर्गति के बाद इन नेताओं ने पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक चिट्ठी लिखकर नेतृत्व के तरीकों पर सवाल उठाए थे। इस चिट्ठी में दस्तखत करने वाले सभी कांग्रेस के सीनियर नेता थे। बदले में कांग्रेस नेतृत्व ने इन सभी नेताओं को दरकिनार करना शुरू कर दिया था। बीते दिनों राज्यसभा में कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने भी इस पर खुलेआम दुख जताया था और कहा था कि ये शायद संसद में उनका आखिरी बयान है। इसकी वजह ये है कि गांधी परिवार पर सवाल खड़े करने वाले गुलाम नबी आजाद को गांधी खानदान ने नाराजगी के कारण दोबारा राज्यसभा तक नहीं भेजा।
