एनसीईआरटी किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ लिखने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने किया ब्लैकलिस्ट, बताया नया चैप्टर छापने से पहले क्या करना होगा
नई दिल्ली। एनसीईआरटी किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर लिखने वाले तीनों लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने ब्लैकलिस्ट करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने बुधवार को कहा कि अब किसी भी सरकारी संगठन में इन तीन लोगों को कोई काम नहीं दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वो एक पूर्व वरिष्ठ जज, एक मशहूर शिक्षाविद और मशहूर प्रैक्टिशनर वाली एक्सपर्ट्स कमेटी बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस चैप्टर की जगह एनसीईआरटी किताब में जो नया चैप्टर लिखा जाएगा, उसे भी उस वक्त तक न छापने का निर्देश दिया है, जब तक कि केंद्र सरकार की ओर से गठित एक्सपर्ट्स की कमेटी इसे मंजूरी न दे।
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार चैप्टर लिखने वालों को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। कोर्ट ने कहा कि उसके आदेश उस वक्त तक प्रभावी रहेंगे, जब तक कि ये तीनों लोग अपना जवाब दाखिल कर आदेश में बदलाव की अपील नहीं करते। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि वो शुरुआत में ही साफ कह देना चाहती है कि इस पर कोई शक नहीं कि प्रोफेसर मिशेल डेनिनो, दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार को या तो भारत की न्यायपालिका के बारे में पूरी जानकारी नहीं या उन्होंने जानबूझकर तथ्यों को चैप्टर में गलत तरीके से पेश किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन तीनों का इरादा 8वीं क्लास के कच्ची उम्र के छात्रों के सामने भारत की न्यायपालिका की नकारात्मक छवि बनाना था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों को अगली पीढ़ी के लिए करिकुलम तैयार करने या किताबों को अंतिम रूप देने के काम में किसी भी तरह शामिल करने की कोई वजह नहीं दिखती। ऐसा कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के साथ सभी राज्य सरकारों और सरकारी धन से चलने वाली संस्थाओं को निर्देश दिया कि वे मिशेल डेनिनो, दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार को अपने यहां सेवा से अलग कर दें। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने चैप्टर वाली सभी किताबों को वापस लेने का एनसीईआरटी को निर्देश दिया था। जिसका पालन हो चुका है।
