अमेरिकी संसद में पेश किया गया ऐसा बिल जो पास हुआ तो तीन साल तक नहीं मिलेगा एच-1बी वीजा
नई दिल्ली। अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद एक ऐसा बिल लाए हैं जो अगर पास हो गया तो तीन साल तक एच-1बी वीजा जारी नहीं हो पाएगा। रिपब्लिकन सांसदों के अनुसार इस विधेयक में एच-1बी वीजा कार्यक्रम में सुधारों का प्रस्ताव है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि एच-1बी वीजा की वजह से अमेरिकी कामगारों पर असर पड़ रहा है। कंपनियां कम सैलरी में एच-1बी वीजा धारक विदेशी लोगों को नौकरी पर रख रही हैं और अमेरिकी लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो रहा है। अगर यह विधेयक पास हो गया तो इससे भारतीयों पर भी बड़ा असर पड़ेगा क्यों कि भारत के बहुत से युवा एच-1बी वीजा पर अमेरिका जाते हैं।
एंड एच-1बी वीजा एब्यूज एक्ट ऑफ 2026’ को एरिजोना से रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन ने पेश किया है। इस बिल के समर्थन में कांग्रेस सदस्य ब्रायन बैबिन, ब्रैंडन गिल, वेस्ली हंट, कीथ सेल्फ, एंडी ओगल्स, पॉल गोसर और टॉम मैक्लिंटॉक ने साइन किए हैं। इस संशोधन बिल में वीजा करने की वार्षिक सीमा को 65,000 से कम करके 25,000 करना, वीजा धारकों का न्यूनतम वेतन 2,00,000 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष निर्धारित करना और एच-1बी वीजा धारकों को आश्रितों को अमेरिका लाने की अनुमति नहीं देना शामिल है।
इसके अतिरिक्त नौकरी प्रदाता कंपनियों को यह साबित करना अनिवार्य होगा कि उन्हें काम के लिए कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल रहा है और उन्होंने किसी प्रकार की कोई छंटनी नहीं की है। विधेयक में ओपीटी को खत्म करने और एच-1बी धारकों को स्थायी निवासी बनने से रोकने का भी प्रावधान है ताकि गैर-प्रवासी वीजा अस्थायी ही रहें। गौरतलब है कि अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनियां विदेशियों को नौकरी पर रखने के लिए एच-1बी वीजा कार्यक्रम का उपयोग करती हैं। एच-1बी वीजा धारकों में भारतीयों की बड़ी संख्या है जो अमेरिका में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
