भारत और न्यूजीलैंड ने एफटीए समेत कई समझौते किए, निर्यातकों से लेकर पेशेवरों और छात्रों को होंगे फायदे ही फायदे
नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो गया। ये भारत और न्यूजीलैंड के कारोबारी रिश्तों में ऐतिहासिक है। मोदी सरकार में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के वाणिज्य मंत्री टॉड मैक्ले ने एफटीए पर दस्तखत किए। एफटीए होने से भारत के निर्यातकों को न्यूजीलैंड में अपना सामान बेचने में बहुत मदद मिलेगी। भारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए सिर्फ 9 महीने की बातचीत के बाद ही हो गया। इस तरह ये सबसे तेजी से होने वाला एफटीए बना है।
एफटीए लागू होने के बाद न्यूजीलैंड अब भारत से आयातित सामान पर कोई टैरिफ नहीं लेगा। अब तक भारत से करीब 450 तरह के सामान न्यूजीलैंड निर्यात होते थे। न्यूजीलैंड इन पर 10 फीसदी टैरिफ लगाता था। एफटीए होने से भारत से निर्यात होने वाला कपड़ा, चमड़े के सामान, चीनी मिट्टी के बर्तन, कालीन, गाड़ियां और उनके पुर्जों पर अब कोई टैरिफ नहीं लगेगा। जिससे इन सबका निर्यात बढ़ेगा। वहीं, भारत भी न्यूजीलैंड से आने वाले कीवी समेत अन्य चीजों पर कोई टैरिफ नहीं लेगा। कुछ चीजों पर टैरिफ बहुत कम लगाया जाएगा। भारत और न्यूजीलैंड के एफटीए के दायरे से दूध, क्रीम, दही, पनीर और मट्ठा के अलावा सभी कृषि उत्पादों को बाहर रखा गया है। इससे भारतीय किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।
न्यूजीलैंड ने तय किया है कि अगले 15 साल में वो भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। एक अन्य समझौते के तहत न्यूजीलैंड पढ़ने जाने वाले छात्रों को भी सहूलियत होगी। न्यूजीलैंड में भारतीय छात्र हर हफ्ते 20 घंटे काम कर सकेंगे। साथ ही उनको लंबी अवधि का पोस्ट स्टडी वर्क वीजा भी मिलेगा। वहीं, भारतीय पेशेवरों को न्यूजीलैंड 5000 अस्थायी रोजगार वीजा का कोटा देगा। इस वीजा के तहत तीन साल तक न्यूजीलैंड में नौकरी की जा सकेगी। खास वर्किंग हॉलिडे वीजा प्रोग्राम का भी भारत और न्यूजीलैंड ने समझौता किया है। इसके तहत हर साल 1000 भारतीय युवा एक साल के लिए मल्टीपल एंट्री के तहत न्यूजीलैंड जा सकेंगे।
