राज्यसभा के बाद वंदे मातरम बिल लोकसभा से भी पास, अब बनेगा कानून, राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान की तरह मिलेगा सम्मान
नई दिल्ली। वंदे मातरम बिल विपक्ष के हंगामे के बीच आज लोकसभा से भी ध्वनिमत से पास हो गया है। इससे पहले यह विधेयक संसद के उच्च सदन राज्यसभा से पारित हो चुका है। अब इस बिल को कानून के रूप में लागू करने की मंजूरी के लिए इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इस बिल के कानून बनने के बाद राष्ट्रगान जन-गण-मन की तरह ही राष्ट्रगीत वंदे मातरम को भी कानूनी सुरक्षा मिल जाएगी। कानून बनने के बाद वंदे मातरम का अपमान करना अपराध के दायरे में आएगा। वंदे मातरम का अनादर करने वालों को तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 राष्ट्र गौरव का विधेयक है, यह किसी राज्य, व्यक्ति या विचारधारा के खिलाफ नहीं है। बीजेपी राष्ट्रगीत का भी सम्मान करती है और आग्रह है कि जब राष्ट्रगान हो तो उसके साथ-साथ राष्ट्रगीत का भी गायन हो। राय ने कहा कि तुष्टिकरण के कारण 1937 में जवाहर लाल नेहरू ने वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो छंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था और एक विचारधारा पनपी थी जिसके कारण देश का बंटवारा हो गया था। अब एक भारत-श्रेष्ठ भारत के लिए संपूर्ण वंदे मातरम चाहिए।
वहीं बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि जब इतने बड़े बिल पर चर्चा हो रही है तो विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। 1950 में डा. राजेंद्र प्रसाद ने सदन में यह आश्वासन दिया था कि वंदे मातरम और जन गण मन दोनों को एक ही सम्मान मिलेगा। मगर 76 सालों में गांधी परिवार ने ऐसा होने नहीं दिया। पीठासीन संध्या राय ने बिल पर ध्वनि मत से वोटिंग कराई और विधेयक के पास होने की घोषणा कर दी। वहीं विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का विरोध किया।
