नेपाल में विनाशकारी बाढ़ में 800 विदेशी नागरिकों समेत 1500 लोग लापता
काठमांडू। नेपाल की भोटेकोशी नदी में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। साथ ही लापता लोगों की तादाद भी बढ़ गई है। अधिकारियों के हवाले से मीडिया ने खबर दी है कि नेपाल और चीन के तिब्बत में कम से कम 800 विदेशी नागरिकों समेत 1500 लोग लापता हैं। लापता लोगों में 300 भारतीय भी हैं। अब तक 160 से ज्यादा लोगों के शव मिल चुके हैं। ये आपदा तिब्बत के ल्हासा को काठमांडी से जोड़ने वाले इलाके में आई थी। इस इलाके से ट्रेकर्स और कैलाश-मानसरोवर यात्री बड़ी तादाद में आते-जाते हैं।
नेपाल की भोटेकोशी नदी के अलावा नारायणी नदी में भी बाढ़ का पानी पहुंचा था। दर्जनों शव नारायणी नदी से बहकर भारतीय सीमा के पास चितवन तक पहुंच गए। इसके अलावा भारतीय सीमा के पास नवलपरासी जिले में भी आपदा से मारे गए लोगों के शव मिले हैं। इसी से पता चलता है कि भोटेकोशी नदी में अचानक आई भयावह बाढ़ से बचने का लोगों को बिल्कुल मौका नहीं मिला। नदी में पानी के साथ इतना मलबा आया कि उसमें बड़ी तादाद में लोगों के दबकर जान गंवाने की आशंका है। नेपाल में इस त्रासदी के बाद प्रभावित इलाकों में हाहाकार मचा है।
माना जा रहा है कि नेपाल की सीमा के पास तिब्बत के इलाके में ग्लेशियर वाली झील फटने के कारण ही ये तबाही हुई है। क्योंकि भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाके में बादल फटने की कोई घटना नहीं हुई है। अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे का कहना है कि पानी का वेग इतना था कि उससे 5.2 तीव्रता से धरती कांप गई थी। चीन की ओर से इस बारे में सर्वे के बाद ही हकीकत का पता चल सकेगा। नेपाल में इससे पहले साल 2015 में विनाशकारी भूकंप आया था। रिक्टर पैमाने पर 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में करीब 9000 लोगों की मौत हुई थी। जिसके बाद अब नदी के रास्ते आपदा ने नेपाल के उत्तरी इलाके के बड़े हिस्से को तहस-नहस किया है।
