मेटा की दिक्कत नहीं हो रही कम, अब कंपनी के अफसरों को यहां होना होगा पेश
नई दिल्ली। वाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाने वाली मार्क जुकरबर्ग की अमेरिकी कंपनी मेटा की दिक्कत कम होती नहीं दिख रही। मेटा के बड़े अफसरों को पहले केंद्र सरकार ने सख्त रुख दिखाते हुए दिल्ली तलब किया था। मेटा के अफसरों को केंद्र ने साफ चेतावनी दी कि अगर उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा मिला, तो कार्रवाई होगी। मेटा से कहा गया कि वो भारत के कानूनों का सख्ती से पालन करे। इस पर मेटा ने रजामंदी जताई है। वहीं, अब मेटा को राष्ट्रीय बाल अधिकार और संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने फिर नोटिस जारी किया है।
एनसीपीसीआर ने ब्रिटेन की मीडिया संस्था बीबीसी की एक रिपोर्ट पर खुद संज्ञान लेते हुए पहले एक नोटिस जारी किया था। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड अब्यूज मैटेरियल के विज्ञापनों का आरोप लगाया था। एनसीपीसीआर ने इस पर मेटा से जवाब मांगा था। मेटा की ओर से एनसीपीसीआर को जवाब भी भेजा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एनसीपीसीआर ने इस मामले में हकीकत का पता लगाने के लिए औपचारिक जांच शुरू की। इस जांच के तहत ही एनसीपीसीआर ने मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और कंपनी के भारत में प्रमुख को तलब किया है।
एनसीपीसीआर ने लगातार फॉलोअप करते हुए मेटा को बच्चों के यौन शोषण के मामलों की रिपोर्टिंग पर अपनी नीति बदलने के लिए मजबूर किया है। नतीजे में मेटा ने ऐसे मामलों की जानकारी भारत के साइबर क्राइम संबंधित को-ऑर्डिनेशन सेंटर को देनी भी शुरू की है। इससे पहले केंद्र सरकार ने सख्त रवैया अपनाते हुए मेटा से कहा था कि वो पुलिस को बाल यौन शोषण से संबंधित सभी जानकारियां तुरंत देगा। साथ ही ऐसे मामलों के कंटेंट भी फेसबुक और इंस्टाग्राम से हटाने पर मेटा राजी हुआ है। एक अन्य कदम के तहत एनसीपीसीआर ने कैपजेमिनी के एक डे-केयर सेंटर में बच्चों के कथित शोषण से संबंधित मामले में संस्था के उपाध्यक्ष को भी तलब किया है। इस मामले में भी एनसीपीसीआर ने सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।
