September 19, 2026

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भारतीय रिफाइनरियों को सऊदी अरब की अरामको से कच्चे तेल की सप्लाई रुकी, हूती के हमले से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन करनी पड़ी है बंद

नई दिल्ली। एक तरफ होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई धीमी है। वहीं, सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले की वजह से भारत के सस्ता कच्चा तेल खरीदने पर बड़ा असर पड़ता दिख रहा है। जानकारी के मुताबिक सऊदी अरब की पेट्रोलियम कंपनी अरामको ने ईस्ट-वेस्ट कच्चे तेल पाइपलाइन पर हूती के हमले के बाद भारत की रिफाइनरियों को फिलहाल कच्चे तेल की आपूर्ति रोक दी है। इससे भारत को महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है।

हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में 1200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर बीते गुरुवार को ड्रोन से हमला किया था। जिसके बाद सऊदी अरब ने सुरक्षा कारणों से इसके जरिए पश्चिमी तट कर कच्चा तेल भेजना बंद कर दिया। इस पाइपलाइन के जरिए हर दिन 70 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जाता था। ये पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी दिशा से पश्चिम के बंदरगाह तक कच्चा तेल ले जाती थी। हूती विद्रोहियों ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के साथ ही सऊदी अरब में अरामकों की कई रिफाइनरियों और कच्चे तेल से संबंधित प्रतिष्ठानों पर हमले किए हैं। साथ ही हूती ने लाल सागर से होकर कच्चा तेल ले जाने वाले सऊदी अरब के जहाजों पर भी हमले की धमकी दी है।

होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की आवक घटने और लाल सागर में जहाजों पर हूती के हमले की धमकी की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में फिर इजाफा शुरू हुआ है। इस महीने की शुरुआत में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल की कीमत से ऊपर चला गया था। खबर लिखे जाने के वक्त ब्रेंट क्रूड की कीमत 98.77 डॉलर प्रति बैरल थी। जबकि, डब्ल्यूटीआई क्रूड 99.53 डॉलर प्रति बैरल पर वायदा कारोबार कर रहा था। सऊदी अरामको से कच्चे तेल की आपूर्ति बंद होने से भारत को अब दूर-दराज के देशों से कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है। जिसकी वजह से ट्रांसपोर्ट चार्ज भी ज्यादा लगेगा। इससे पहले जब अमेरिका से युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज से जहाजों का आना-जाना पूरी तरह बंद कर दिया था, तब भारत को महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ा था। उसकी वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कुछ बढ़ोतरी हुई थी।

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