‘एससी-एसटी सांसदों को बिलों पर चर्चा के वक्त बोलने का ज्यादा वक्त मिले’, मोदी सरकार में मंत्री जीतन राम मांझी की लोकसभा स्पीकर से मांग
नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के सामने नई मांग उठी है। मोदी सरकार में मंत्री और एनडीए के सहयोगी दल HAM के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि संसद में अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान एससी और एसटी सांसदों को बोलने का ज्यादा वक्त दिया जाए। अपनी चिट्ठी में जीतन राम मांझी ने लोकसभा स्पीकर से कहा है कि खरगोन से बीजेपी के सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने उनके आवास पर हुई बैठक में ये मुद्दा उठाया था। गजेंद्र सिंह पटेल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि पार्टियों को मिलने वाला वक्त सांसदों में बंट जाता है। इसलिए एससी-एसटी सांसदों को ज्यादा समय मिलना चाहिए।
जीतन राम मांझी ने ओम बिरला से आग्रह किया है कि एससी और एसटी सांसदों को लोकसभा में बोलने के लिए ज्यादा वक्त देने के मामले में कदम उठाते हुए संबंधित अफसरों को इसके लिए निर्देश जारी करें। एससी और एसटी सांसदों को बिलों पर अपनी राय रखने के लिए ज्यादा वक्त देने की मांग पहली बार उठी है। खास बात ये है कि एनडीए के ही घटक एलजेपी-आर के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बीते दिनों आरक्षण की किसी तरह की समीक्षा का विरोध किया था। वहीं, जीतन राम मांझी ने कहा था कि आरक्षण का फायदा एससी समाज की कुछ खास और संपन्न जातियों को बार-बार मिल रहा है। जबकि, नट, मुसहर और भुइयां जैसों तक लाभ नहीं पहुंच रहा।
जीतन राम मांझी की पार्टी और बिहार सरकार में उनके मंत्री बेटे संतोष कुमार सुमन ने एससी और एसटी आरक्षण में उप वर्गीकरण करने की मांग की है। आरक्षण का लाभ एससी और एसटी के अन्य पिछड़े लोगों तक पहुंचाने के मुद्दे ने भी इधर जोर पकड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों एक फैसला सुनाते हुए राज्यों से कहा था कि वे वैज्ञानिक आधार पर लिए डेटा के जरिए एससी आरक्षण में उप वर्गीकरण करें। चिराग पासवान समेत कई दलित नेता इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में जीतन राम मांझी की लोकसभा अध्यक्ष से की गई मांग पर भी बयानबाजी की संभावना दिख रही है।
