टीसीएस अमेरिका में 5 साल में करेगी 15 हजार भर्तियां, ट्रंप प्रशासन के फैसले से प्रभावित नहीं होगा कंपनी का बिजनेस मॉडल
नई दिल्ली। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने ट्रंप प्रशासन के ग्रीन कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया पर रोक वाले फैसले के बाद कहा है कि वो अगले 5 साल में अमेरिका में 15 हजार कर्मचारियों की भर्ती करेगी। टीसीएस के अनुसार वो अमेरिकी श्रम विभाग के हर निर्देश का पूरी तरह पालन करेगी लेकिन परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PREM) के निलंबन से कंपनी का बिजनेस मॉडल या क्लाइंट्स से प्रोजेक्ट्स प्रभावित नहीं होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा 8 कंपनियों टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट, कैपजेमिनी और एडोब को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से बाहर कर दिया गया है।
टीसीएस ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि इससे स्थानीय युवाओं को नौकरी मिलेगी। अमेरिका में उसके 31 ऑफिस और डिलीवरी केंद्र हैं, जहां बड़ी संख्या में पहले से ही स्थानीय कर्मचारी काम कर रहे हैं। दरअसल, ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम का लाभ उठा रही हैं जिनका उद्देश्य विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देना है। इसका असर अमेरिकियों पर पड़ रहा है और उनके नौकरी के अवसर कम हो रहे हैं। इसी के मद्देनजर सरकार ने इन 8 आईटी कंपनियों को PERM प्रोग्राम में हिस्सा लेने से रोक दिया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन कंपनियों की ओर से अब ग्रीन कार्ड के लिए नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और जो मामले लंबित हैं उनकी प्रोसेसिंग भी नहीं होगी।
ट्रंप प्रशासन के फैसले का भारतीयों पर क्या होगा असर?
वहीं ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से अमेरिका में रह रहे वो भारतीय प्रभावित होंगे जो ग्रीन कार्ड हासिल कर स्थाई नागरिक बनना चाहते हैं। हालांकि लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम के निलंबन से अमेरिका में काम कर रहे किसी कर्मचारी का H-1B वीजा स्वत: कैंसिल नहीं होगा। बता दें कि अमेरिका की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में भारतीय मूल के 52 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं।
