April 25, 2026

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UP : मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाने की थी साजिश, CM योगी का संकल्प, अब घर-घर पहुंचाएंगे काशी विश्वनाथ का सच

नई दिल्ली। देश हो या व्यक्ति…इतिहास का साथ अटूट होता है…हम बेशक अपने वर्तमान को सुसज्जित कर इतिहास से पीछा छुड़ाने की कोशिश करें.. लेकिन अतीत के बिना हम अपने अस्तित्व की भी कल्पना नहीं कर सकते हैं। वहीं, पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि चुनाव के दौरान कुछ सियासी सूरमा अपने लिए अतीत का इस्तेमाल अपने लिए  ढाल की तरह करते हैं। अब यह अतीती ढाल उन्हें आने वाले चुनाव में जीत दिला पाने में कितना सफल साबित होती है। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर आज अतीत पर बात क्यों की जा रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से अतीत पर बहस शुरू हो चुकी है और इस बहस की शुरूआत किसी और ने नहीं, बल्कि खुद प्रधाननंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर के लोकापर्ण से की है और अब इस बहस को आगे बढ़ाने का बीड़ा खुद सीएम योगी ने अपने कांधे पर उठा लिया है।

शायद आपको याद हो कि काशी दौरे के दौरान पीएम मोदी ने मुगल आक्रांता औरंगजेब का जिक्र कर बताया था कि कैसे उसने मंदिर को खंडित करने का दुस्साहस किया था, लेकिन कालांतर में कई विध्वंसों को झेलने के बावजूद भी यह मंदिर यथावत स्थापित है। यह महादेव का आशीर्वाद है। अब इसे लेकर सीएम योगी ने 52 पन्नों की पुस्तिका जारी की है, जिसमें इस मंदिर के संपूर्ण इतिहास व इसे विध्वंसित करने वाले मुगलों आक्रांताओं के बारे में विस्तार से बताया गया है। पुस्तिका में बताया गया है कि कैसे ओरंगजेब से लेकर मोहम्मद गोरी ने मंदिर को अपने कहर का शिकार बनाकर वहां मस्जिद निर्माण करने का दुस्साहस किया था। आइए, आगे विस्तार से आपको बताते हैं कि सीएम योगी द्वारा जारी किए गए इस पुस्तिका में उक्त मंदिर के संदर्भ में क्या कुछ बताया गया है।

जानिए यहां सब कुछ

सबसे पहले तो आप यह जान लीजिए कि यह पुस्तिका पूरे 52 पन्नों की है। इसमें मुख्य रूप से बाबा विश्व नाथ मंदिर व मुगल आक्रांताओं के बारे में बताया गया है। पुस्तिका में बताया गया है कि 18 अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को संपूर्ण रूप से ध्वस कर दिया था। औरंगजेब के इस क्रूरता की दास्तां आज भी कोलकाता के इतिहासकारों ने इतिहास में दर्ज किया हुआ है। पुस्तिका में बताया गया है कि औरंगजेब ने न महज मंदिर को ध्वस्त करने का निर्दश दिया था अपितु मस्जिद बनाने का भी फरमान जारी किया था। इसके लिए उसने मंदिर के गर्भगृह को भी ढहा दिया था। इसके बाद सनातन अनुयायियों ने अपनी आस्था को संरक्षित रखने के ध्येय से मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था। यही नहीं, औरगंजेब से पूर्व भी मंदिर को 1194 में मोम्मद गौरी ने ध्वस्त करवा दिया गया था। इसके बाद फिर सनातन अनुयायियों ने इसका निर्माण करवाया था। जिसके बाद 1447 जौनपुर सुल्तान मोहम्मद शाह मंदिर को ध्वस्त करवा दिया था। इसके बाद नारायण भट्ट ने मंदिर को निर्माण करवाया था। 1632 में शाहजहां ने फिर मंदिर को नष्ट करवा दिया था।

शाहाजंहा ने अन्य मुगल शासकों से एक कदम बढ़ते हुए काशी के  63 मंदिरों को नष्ट करवा दिया था। 1669 में औरंगजेब के मंदिर के विनाश के बाद, मराठा नेता दत्ताजी सिंधिया और मल्हारराव होल्कर ने 1752 और 1780 के बीच, और 1770 में महादजी सिंधिया ने दिल्ली में मुग़ल बादशाह शाह आलम द्वितीय यानी अली गौहर ने मंदिर विध्वंस की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश भी जारी कर दिया. लेकिन तब तक काशी पर ईस्ट इंडिया कंपनी का राज हो गया और मंदिर का काम रुक गया। बुकलेट में बताया गया है कि 30 दिसंबर 1810 को बनारस के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट वाटसन ने ‘वाइस प्रेसीडेंट इन काउंसिल’ को एक पत्र लिखकर ज्ञानवापी परिसर हिन्दुओं को हमेशा के लिए सौंपने के लिए कहा था, लेकिन यह कभी संभव ही नहीं हो पाया।

वहीं, चुनाव से पहले सीएम योगी द्वारा जारी किए इस पुस्तिका को लोग सियासी गलियारों में सियासी चश्मों से देखना शुरू कर चुके हैं। बीजेपी के धुर विरोधियों का कहना  कि जनहितों को मुद्दों से प्रदेशवासियों को ध्यान भटकाने के लिए यह पुस्तिका जारी की गई है। असम मुद्दों से ध्यान भटकाने के  लिए अतीत का सहारी लिया जा रहा है। हालांकि, यह कोई पहली मर्तबा नहीं है कि जब बीजेपी ने किसी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अतीत का सहारा लेती हुई नजर आ रही है, बल्कि इससे पहले भी चुनाव में फतह हासिल करने के लिए अतीत का सहारा लेती हुई दिखी है।

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