June 1, 2026

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जानें, किस मामले में ब्रिटेन में छिपा बैठा है वाड्रा का करीबी संजय भंडारी, मोदी सरकार के एक्शन के बाद कांग्रेस में…

नई दिल्ली। वैसे तो हर छोटे-बड़े मसले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग छिड़ी रहती है, लेकिन आज यानी की सोमवार को ब्रिटेन में कुछ ऐसा हुआ, जिसके बाद भारत में सियासी फिजा का पारा चढ़ सकता है। बता दें कि ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने हथियार खरीद मामले में आरोपी संजय भंडारी के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। अब भंडारी के भारत आने का रास्ता साफ हो चुका है। बीते दिनों भारत ने ब्रिटेन से भंडारी को भेजने का आग्रह किया था, जिसे तत्कालीन गृह मंत्री प्रीति पटेल ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद भंडारी को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन उसने अपनी जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उसे 1.20 लाख पाउंड की सिक्योरिटी के साथ अपना पासपोर्ट जमा कराने, मध्य लंदन स्थित घर में नजरबंद रहने और नजदीकी पुलिस स्टेशन में रोजाना हाजिरी लगाने सरीखे शर्तों के साथ जमानत दे दी गई थी। भंडारी पर भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी लग चुके हैं। यही नहीं, साल 2016 भंडारी के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन इस नोटिस को चकमा देते हुए भंडारी ब्रिटेन भाग गया। आइए, आगे कि रिपोर्ट में हम आपको उस पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, जिसे संज्ञान में लेने के बाद संजय भंडारी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

जानिए पूरा माजरा

यह पूरा माजरा हथियारों के डील से जुड़ा हुआ है। संजय भंडारी का कहना है कि उन्हें थेल्स कंपनी ने भारतीय वायुसेना के लिए 2 हजार सैन्य जेट को अपग्रेड करने के लिए 2.4 बिलियन यूरो के कॉन्ट्रेक्ट का काम सौंपा था। भंडारी ने दावा किया था कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक करवाकर अपग्रेड के अनुबंध को बेचने में मदद की थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भंडारी का कहना है कि थेल्स ने उन्हें 20 मिलयन यूरो देने का उनपर दबाव बनाया था। लेकिन, राजनतिक कारणों की वजह से वो भुगतान नहीं कर सकें थे। इसके अलावा भंडारी पर यह भी आरोप है कि उसने काला धन विदेश में भेजा था, ताकि कालाधन देने से बचा जा सकें। जिससे नेशनल एक्सचेंजर को काफी नुकसान हुआ था।

रक्षा सौदे में रिश्वत लेने का आरोप

इसके साथ ही संजय भंडारी पर रक्षा सौदे में रिश्वत लेने का आरोप लगा है। भंडारी पर आरोप है कि उनके पास विदेशी कंपनियों से संबंधित कई ऐसे असेट मौजूद हैं, जिसकी कोई पारदर्शियता ही नहीं है। यही नहीं, संजय पर रक्षा डील मामले में रिश्वत लेने के भी आरोप लग चुके हैं। वहीं, संजय को रॉबट वाड्रा का करीबी भी बताया है। बता दें कि संजय भंडारी को मिली प्रत्यर्पण मंजूरी के बाद मीडिया ने रॉबर्ट वाड्रा से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की लेकिन उसने साफ इनकार कर दिया। अब ऐसे में आगामी दिनों में यह पूरा माजरा क्या रुख अख्तियार करता है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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