कौन हैं अनिल मेनन?, सुनीता विलियम्स के बाद ये उपलब्धि हासिल करने वाले भारतीय मूल के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बनेंगे
नई दिल्ली। भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन कजाकिस्तान से रूस के सोयूज एमएस-29 रॉकेट के जरिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जा रहे हैं। सुनीता विलियम्स के बाद अनिल मेनन अंतरिक्ष में लंबे वक्त तक वक्त गुजारने की उपलब्धि हासिल करने वाले भारतीय मूल के दूसरे अंतरिक्ष यात्री होंगे। खास बात ये है कि अनिल मेनन फिजिशियन के साथ ही इंजीनियर और अंतरिक्ष यात्री भी हैं। अनिल के साथ अंतरिक्ष स्टेशन जाने वालों में रूस के प्योत्र दुबरोव और अन्ना किकिना भी होंगे। ये तीनों आठ महीने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर गुजारेंगे।
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में अनिल मेनन हाई क्वालिटी सेमीकंडक्टर क्रिस्टल संबंधी परीक्षण करेंगे। ताकि इलेक्ट्रॉनिक्स को उन्नत किया जा सके। इसके अलावा इंटेलिजेंस सहायक अल्ट्रासाउंड, अंतरिक्ष में शरीर में खून के बहने और बायोप्रिंटिंग टेक्नोलॉजी पर भी अनिल मेनन शोध करेंगे। जिससे उम्र बढ़ना कम करने और शरीर के ऊतकों को ठीक करने में मदद मिलेगी। अनिल मेनन के पिता भारतीय थे और उनकी मां यूक्रेन की थीं। अनिल मेनन को नासा ने 2021 में बतौर अंतरिक्ष यात्री चुना था। नासा ज्वॉइन करने से पहले अनिल मेनन, एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स में फर्स्ट फ्लाइट सर्जन थे। वो इमरजेंसी मेडिसिन फिजिशियन और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल भी रहे।
अनिल मेनन की ये पहली अंतरिक्ष यात्रा होने जा रही है। हालांकि, उन्होंने इंसान को अंतरिक्ष में भेजे जाने के संबंध में बहुत काम किया है। लंबे समय से अनिल मेनन अंतरिक्ष में इंसान को भेजने और वहां उनका स्वास्थ्य ठीक रखने के काम से जुड़े रहे हैं। कई साल की उनकी ट्रेनिंग अब खुद के अंतरिक्ष यात्री बनने में मदद करने वाली है। अगर सबकुछ ठीक रहा, तो अनिल मेनन और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री अप्रैल 2027 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से धरती पर लौटेंगे। उनके पास नए शोध और ज्ञान का खजाना होगा। जिसे इंसान और धरती की भलाई के लिए अनिल मेनन और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री इस्तेमाल कर सकेंगे।
