‘भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में पहली आरती का अधिकार सिर्फ मैसुरु के महाराज का…डीके शिवकुमार न करें राजनीति’, तिरुपति बोर्ड की खरी-खरी
तिरुपति/बेंगलुरु। तिरुपति में भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर का प्रबंधन देखने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड (टीटीडी) ने साफ कह दिया है कि मंदिर में हर दिन पहली आरती का अधिकार सिर्फ मैसुरु के महाराज का है। बोर्ड के सदस्य जी. भानुप्रकाश रेड्डी ने कहा कि कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार इस मामले में राजनीति न करें। रेड्डी ने कहा कि पहली आरती में शामिल होने का हक सिर्फ मैसुरु के महाराज को दिया गया। ये अधिकार शिवकुमार की कैबिनेट या विधायकों का नहीं।
टीटीडी बोर्ड सदस्य जी. भानुप्रकाश रेड्डी ने ये भी कहा है कि तिरुपति आध्यात्मिक जगह है। अगर कर्नाटक की बात मान ली गई, तो केरल और तमिलनाडु जैसे अन्य राज्य भी यही मांग करने लगेंगे। दरअसल, कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने हाल में कहा था कि तिरुपति में भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में पहली आरती के लिए सांसदों और विधायकों को भी शामिल करने की मंजूरी देने वाला प्रस्ताव उनकी सरकार लाएगी। तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर के प्रसिद्ध मंदिर को बनवाने में मैसुरु के तत्कालीन महाराज कृष्णदेव राय की बड़ी भूमिका रही थी। इसी वजह से मंदिर में हर दिन सुबह होने वाली पहली आरती का अधिकार मैसुरु के राजघराने को मिला है। मैसुरु राजघराने के लोग हर समय तिरुपति में नहीं रह सकते। इस वजह से उन्होंने आरती में शामिल होने के लिए अपना प्रतिनिधि रखा है।
कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार मैसुरु राजघराने के प्रतिनिधि को राज्य सरकार से जोड़ते हुए सांसदों और विधायकों को भी पहली आरती का हकदार बनाने की बात कह रहे हैं। शिवकुमार ने कहा था कि उन्होंने इस विशेषाधिकार को मंत्री, सांसद, विधायक, जज या कर्नाटक सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी व्यक्ति तक देने का निर्देश दिया है। शिवकुमार ने कहा था कि ये उनके कार्यकाल का सबसे अहम एलान होगा। जिससे कर्नाटक की सेवा करने वाले भगवान की आरती कर प्रार्थना कर सकेंगे। अब टीटीडी बोर्ड की ओर से इससे साफ इनकार कर दिया गया है कि मैसुरु के महाराज के अलावा किसी और को भगवान वेंकटेश्वर की दैनिक पहली आरती का मौका दिया जाएगा। इस मुद्दे पर अब कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच भी बयानों की जंग छिड़ सकती है। भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में है।
