कर्नाटक सरकार में मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा, डीके शिवकुमार कैबिनेट में विभागों के बंटवारे पर अनबन
नई दिल्ली। कर्नाटक में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब कांग्रेस सरकार में फिर से एक विवाद शुरू हो गया है। कैबिनेट में विभागों के बंटवारे से नाराज मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रामलिंगा रेड्डी का कहना है कि उनको बेंगलुरु अर्बन डेवलपमेंट (जीबीए) विभाग देने का आश्वासन दिया गया था मगर उनको जल संसाधन मंत्री बनाया गया है। इसी बात से नाराज होकर रेड्डी ने मंत्री पद छोड़ने का एलान कर दिया। हालांकि रेड्डी का कहना है कि मैं किसी व्यक्ति से नाराज नहीं हूं लेकिन अपने आत्मसम्मान के लिए मुझे मंत्री पद छोड़ने का फैसला लेना पड़ा।
रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा देने के बाद प्रेस कांफ्रेंस की। जिसमें उन्होंने कहा कि मेरा यह कदम पार्टी विरोधी नहीं है, मैं कांग्रेस में ही हूं और हमेशा रहूंगा। विधायक के रूप में जनता के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाऊंगा। रेड्डी बोले, मैंने कभी किसी मुख्यमंत्री से मंत्री पद या कोई विशेष विभाग नहीं मांगा। जब मैं सिद्धारमैया सरकार में मंत्री था तो डीके शिवकुमार ने मुझसे कहा था कि जब मैं मुख्यमंत्री बनूंगा तब आपको बेंगलुरु शहरी विकास मंत्रालय का पोर्टफोलियो दूंगा, लेकिन अब सीएम बनने के बाद शिवकुमार ने अपना वादा पूरा नहीं किया और मुझे आपको बेंगलुरु शहरी विकास मंत्रालय की जगह जल संसाधन मंत्रालय दे दिया।
मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जब रामलिंगा रेड्डी जाने लगे तो उनके समर्थकों ने उनसे अपना फैसला वापस लेने की अपील की और उनकी गाड़ी के आगे लेट गए लेकिन वो अपने फैसले से पीछे नहीं हटे। डीके शिवकुमार सरकार में कृष्णा बायरे गौड़ा को बेंगलुरु शहरी विकास मंत्रालय दिया गया है। बता दें कि रामलिंगा कर्नाटक में कांग्रेस के बड़े नेता माने जाते हैं। वह लगातार आठ बार विधायक चुने जा चुके हैं। वीरप्पा मोइली की सरकार से लेकर सिद्धारमैया की सरकार तक में वो मंत्री रह चुके हैं। इस दौरान उनके पास गृह मंत्री, परिवहन मंत्रालय समेत कई महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो रहे।
