शरिया लागू नहीं होने दूंगा…सऊदी अरब में इसे पढ़ने गए लोगों को लौटने की मंजूरी नहीं’, मुस्लिम बहुल बुर्किना फासो के राष्ट्रपति कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे का एलान
औगाडौगू (बुर्किना फासो)। बुर्किना फासो अफ्रीका में छोटा सा मुस्लिम बहुल देश है। इसी बुर्किना फासो के अंतरिम राष्ट्रपति कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे ने साफ कर दिया है कि अपने देश का इस्लामीकरण नहीं होने देंगे। हाल ही में कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे ने कहा कि मैं मुस्लिम हूं, लेकिन बुर्किना फासो में हर नागरिक को अपने धर्म को मानने की आजादी है। ट्राओरे ने एलान किया कि वो कभी भी बुर्किना फासो में शरिया लागू नहीं होने देंगे।
बुर्किना फासो के अंतरिम राष्ट्रपति ने सऊदी अरब में शरिया की पढ़ाई करने गए अपने देश के छात्रों से कहा है कि वे वापस न लौटें। कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे ने चेतावनी देते हुए कहा कि तकनीकी ज्ञान या कौशल हासिल करने की जगह ये छात्र शरिया पढ़ने गए हैं, तो वहीं रहें। इन छात्रों को बुर्किना फासो लौटने की मंजूरी नहीं मिलेगी। बता दें कि इब्राहिम ट्राओरे ने सितंबर 2022 में तख्तापलट के बाद बुर्किना फासो की सत्ता हासिल की थी। ट्राओरे का जन्म 14 मार्च 1988 को हुआ था। उन्होंने उपनिवेश बनने, भ्रष्टाचार और जिहादियों के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे को बुर्किना फासो के अलावा दुनियाभर में तमाम लोग पसंद करते हैं।
ट्राओरे ने हमेशा बुर्किना फासो की संप्रभुता, सुरक्षा और परंपरा पर आधारित न्याय व्यवस्था की वकालत की है। वो रूस और उसके करीबियों से जुड़े हैं। फ्रांस जैसे ताकतवर देश को उन्होंने बुर्किना फासो की सियासत से दूर कर दिया है। बुर्किना फासो में करीब 2.2 करोड़ लोग रहते हैं। इनमें से 63 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम हैं। बुर्किना फासो में 26 फीसदी ईसाई और 9 फीसदी अन्य धर्मों को मानने वाले अफ्रीकी भी हैं। बुर्किना फासो के संविधान के तहत देश धर्मनिरपेक्ष है। जो धार्मिक आजादी की गारंटी देता है। हालांकि, साल 2016 से यहां कट्टरपंथी जिहादी गुटों ने कई जगह हमले किए हैं। जिनमें सैकड़ों लोगों को जान गंवानी पड़ी है। इससे पहले भी बुर्किना फासो में हिंसा होती रही है। जिसकी वजह से हजारों लोगों की मौत हुई थी। पहले बुर्किना फासो फ्रांस का उपनिवेश था।
