दारा सिंह होगा रिहा?, ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों की हत्या में काट रहा उम्रकैद की सजा
भुवनेश्वर। 26 साल से ओडिशा की जेल में कैद रवींद्र पाल सिंह उर्फ दारा सिंह के रिहा होने के आसार बढ़ते दिख रहे हैं। दारा सिंह को ऑस्ट्रेलिया के मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों को जिंदा जलाकर मारने में उम्रकैद की सजा हुई थी। ओडिशा सरकार ने साल 2022 में रेमिशन नीति बनाई थी। जिसके तहत मौत की सजा को उम्रकैद में बदले जाने पर और संबंधित कैदी के 25 साल तक जेल में रहने पर रिहा किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से कहा है कि वो 19 अगस्त तक दारा सिंह की रेमिशन याचिका पर फैसला ले।
दारा सिंह कैद में जाने के बाद एक दिन के लिए भी जेल से बाहर नहीं आया। जेल में उसका व्यवहार भी ठीक रहा है। ऐसे में दारा सिंह के जेल की सलाखों से बाहर आने की काफी उम्मीद है। दारा सिंह और उसके साथियों ने 22/23 जनवरी 1999 की दरम्यानी रात ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में ऑस्ट्रेलिया के मिशनरी ग्राहम स्टेंस के साथ उनके बेटों 10 साल के फिलिप और 6 साल के टिमोथी को मार डाला था। दारा सिंह ने अपनी सजा माफ करने के लिए जो याचिका दी है, उसमें उसने कहा है कि लंबा वक्त जेल में गुजारा है। युवावस्था में गुस्से के आवेश में किए गए इस अपराध के लिए उसे पछतावा है।
ग्राहम स्टेंस अपने बेटों के साथ क्योंझर जिले के मनोहरपुर में एक जंगल शिविर में गए थे। वहां ईसाइयों की सभा हो रही थी। धर्मांतरण का आरोप लगाकर रात को दारा सिंह के नेतृत्व में बड़ी भीड़ ने लाठियों और हथियारों से लैस होकर शिविर पर हमला किया। उन्होंने जीप में सो रहे स्टेंस और उनके दोनों बेटों को जिंदा जला दिया। ग्राहम स्टेंस और उनके बेटों की जलाकर हत्या का मामला पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना। भारत में मिशनरियों की सुरक्षा पर चिंता जताई गई। उस वक्त राष्ट्रपति रहे केआर नारायणन ने इस हत्याकांड की निंदा की। क्योंझर पुलिस ने 49 लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन दारा सिंह फरार था। फिर सीबीआई को जांच दी गई थी। इस मामले में जांच के लिए केंद्र सरकार ने वाधवा आयोग भी बनाया था। दारा सिंह को 31 जनवरी 2000 को गिरफ्तार किया गया था। 37 लोग इस मामले में कोर्ट से बरी हो गए थे। दारा सिंह को पहले मौत की सजा मिली थी। ओडिशा हाईकोर्ट ने इसे उम्रकैद में बदल दिया था।
