भारत ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता हासिल की, डीआरडीओ का टेस्ट सफल
चांदीपुर (ओडिशा)। भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने एक बार फिर देश को गर्व का मौका दिया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने अलग-अलग खतरों के खिलाफ रक्षा क्षमता का सफल परीक्षण किया है। डीआरडीओ ने 10 और 11 जून को ओडिशा के चांदीपुर से इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों और एंटी शिप क्षमता के मल्टी लेयर्ड डिफेंस संबंधी मिसाइल टेस्ट किए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन अहम परीक्षण पर डीआरडीओ को बधाई दी है।
डीआरडीओ ने जिन मिसाइलों का परीक्षण किया, उनमें मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी है। इस सिस्टम के तहत टेस्ट की गई मिसाइलों ने अपने लक्ष्यों को सफलता से नष्ट कर दिया। डीआरडीओ की ओर से इन परीक्षण के बाद भारत उन खास देशों की श्रेणी में आ गया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों तक को नष्ट करने की क्षमता है। डीआरडीओ ने इसके अलावा एंटी शिप मीडियम मिसाइल का पहला टेस्ट भी सफलता से किया। डीआरडीओ के मुताबिक रुद्रम-2 मिसाइल का परीक्षण काफी चुनौती वाला रहा। परीक्षण के दौरान दागी गई मिसाइलों ने अपने लक्ष्यों को सटीक तरह से भेद दिया।
बता दें कि रुद्रम-2 मिसाइल को डीआरडीओ की हैदराबाद लैब ने डीआरडीएल, एचईएमआरएल, एआरडीई और आईटीआर समेत कई लैब के सहयोग से तैयार किया है। पहले ही डीआरडीओ ने भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर हवा से जमीन पर मार करने वाली रुद्रम-2 मिसाइल का परीक्षण किया था। भारत ने दुश्मन देशों की मिसाइलों और ड्रोन के खिलाफ अपनी क्षमता ऑपरेशन सिंदूर के वक्त दिखाई थी। जब पाकिस्तान की ओर से दागी गई हर मिसाइल और ड्रोन को मार गिराया गया था। अब इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल से बचाव का तरीका भी भारत ने ढूंढ निकाला है। जो पाकिस्तान और चीन के माथे पर जरूर बल लाएगा। इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों के वॉरहेड अंतरिक्ष से प्रवेश कर हमला करते हैं। जिसकी वजह से इनको रोकना काफी कठिन माना जाता है। भारत के पास दुश्मनों को दहलाने के लिए तमाम तरह की मिसाइलें पहले से ही हैं।
