#BanDrishtiIAS: कुत्ते के चाटे घी की तुलना सीता मां से कर विवादों में घिरे विकास दिव्यकीर्ति, Twitter पर भड़के लोग कर रहे बैन की मांग
नई दिल्ली। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर हर दिन कुछ न कुछ ट्रेंड होता रहता है। इस वक्त ट्विटर पर #BanDrishtiIAS खूब ट्रेंड हो रहा है। अधिकतर हिंदूवादी लोग इसे बैन करने की मांग करते हुए अपना गुस्सा जता रहे हैं लेकिन ये पूरा मामला क्या है आइए विस्तार से समझाते हैं आपको कि आखिर क्या है Drishti IAS जिसे बैन करने की मांग की जा रही है और क्यों… बता दें, ‘दृष्टि द विजन’ की स्थापना नवंबर 1999 में हुई थी। जिसे डॉ. विकास दिव्यकीर्ति और डॉ. तरुणा वर्मा ने शुरू किया था। ये एक संस्थान है जो कि यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी से जुड़ा हुआ है।
हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में इनके संस्थान से सिविल सेवा की तैयारी के लिए सिखाया जाता है। इनके अपने यू ट्यूब चैनल और ‘दृष्टि द विजन’ की वेबसाइट भी है जिस पर अच्छी खासी संख्या में छात्रों का जमावड़ा देखा जाता है। हालांकि अब कोचिंग इंस्टीट्यूट के संस्थापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वो हिन्दुओं के भगवान राम और मां सीता को लेकर कुछ ऐसी बातें कहते दिख रहे हैं जिससे सुनने के बाद लोगों का गुस्सा भड़क गया है।
वीडियो देखने के बाद भड़के लोग कर रहे बैन की मांग
सोशल मीडिया पर जो वीडियो सामने आया है इसमें विकास दिव्यकीर्ति भगवान राम और माता सीता को लेकर कुछ बातें करते हुए कहते हैं, “एक बार भगवान राम ने सीता माता से कहा था कि अगर तुम्हें लगता है कि मैंने ये लड़ाई तुम्हारे लिए लड़ी तो तुम गलत हो, मैंने ये लड़ाई मेरे कुल के लिए लड़ी है। रही बात तुम्हारी तो जैसे कुत्ते द्वारा चाटे जाने के बाद जैसे घी या भोजन खाने योग्य नहीं होता वैसे ही तुम अब मेरे लायक नहीं हो”
अब लोग विकास दिव्यकीर्ति द्वारा भगवान राम और माता सीता के लिए कही गई बातों को सुनने के बाद गुस्से में हैं। ट्विटर पर ज्यादातर हिन्दूवादी लोग विकास दिव्यकीर्ति के इस संस्थान Drishti IAS को बैन करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा विकास दिव्यकीर्ति की गिरफ्तारी की मांग तेजी से उठ रही है। लोग दिव्यकीर्ति पर हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा रहे हैं।
नीचे देखिए ट्विटर पर आए लोगों के रिएक्शन
हेमेंद्र नाम के एक यूजर ने वीडियो के कमेंट पर लिखा, ‘जब मेरे राम के जीवन और उनके संघर्ष के विषय में जानकारी न हो तो तुम्हे झूठा और फर्जी ज्ञान बांटने का अधिकार किसने दिया, अब मेरे आराध्य का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा, इस बात को सभी वामपंथी और पढ़े-लिखे ज्ञानी महापुरुष दिमाग में बिठा लें’।
