May 31, 2026

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बीएसपी सुप्रीमो मायावती की बढ़ी मुश्किल, 175 करोड़ के ताज कॉरिडोर घोटाले में चल सकता है केस

लखनऊ। बीएसपी सुप्रीमो मायावती की मुश्किलें बढ़ी दिख रही हैं। ताज कॉरिडोर घोटाला मामले में सीबीआई को आरोपियों में शामिल नेशनल प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनपीसीसीएल) के रिटायर्ड एजीएम महेंद्र शर्मा के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी मिल गई है। ये मंजूरी करीब 20 साल बाद मिली है। 175 करोड़ रुपए की ताज कॉरिडोर परियोजना घोटाले में मायावती, उनकी सरकार में मंत्री रहे और अब कांग्रेस के नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी, यूपी के पूर्व चीफ सेक्रेटरी डीएस बग्गा, मायावती के तब तत्कालीन प्रमुख सचिव रहे और अब कांग्रेस नेता पीएल पुनिया, पर्यावरण विभाग के तब प्रमुख सचिव रहे आरके शर्मा, पर्यावरण विभाग के तब सचिव रहे वीके गुप्ता, इसी विभाग के अनुभाग सचिव राजेंद्र प्रसाद, केंद्रीय पर्यावरण विभाग के तब सचिव रहे केसी मिश्रा, एनपीसीसीएल के तब चेयरमैन और एमडी रहे एससी बाली, इक्षवाकु इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और कंसल्टेंट्स आर्किटेक्ट्स एंड प्लानर्स लिमिटेड भी आरोपी हैं।

सभी आरोपियों पर सीबीआई ने धोखाधड़ी, बहुमूल्य मामले की जालसाजी, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी के लिए साजिश, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल और भ्रष्टाचार विरोधी कानून की धारा 13(2) और 13(1)-डी के तहत केस दर्ज किया था। अब महेंद्र शर्मा के खिलाफ केस की मंजूरी मिलने के बाद बाकी आरोपियों पर भी केस चलने का रास्ता साफ हो गया है। सीबीआई की विशेष अदालत में इस मामले में अब 22 मई को सुनवाई होगी। सीबीआई इस तारीख को कोर्ट में आरोपियों के बारे में दाखिल स्पेशल लीव पिटिशन की भी जानकारी देगी। ताज कॉरिडोर घोटाले का केस 5 अक्टूबर 2002 को सीबीआई ने दर्ज किया था और 2003 में जांच शुरू की थी। इस योजना के तहत ताजमहल से लेकर आगरा फोर्ट तक के दो किलोमीटर के रास्ते पर एक कॉरिडोर यानी गलियारा बनाने की बात थी। इस गलियारे में शॉपिंग कॉम्पलेक्स, टूरिस्ट कॉम्पलेक्स, एम्यूजमेंट पार्क और रेस्त्रां बनाए जाने थे।

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक ताज कॉरिडोर को बनाने के लिए एनपीसीसीएल को ठेका दिए बिना ही 17 करोड़ और 20 करोड़ की रकम जारी कर दी गई। कंपनी से न डीपीआर लिया गया और न ही उसे वर्क ऑर्डर ही जारी हुआ था। सीबीआई इस मामले में एनपीसीसीएल के चेयरमैन और एमडी रजनीकांत अग्रवाल को गवाह भी बना रही है। खास बात ये है कि इस मामले में साल 2007 में मायावती और नसीमुद्दीन सिद्दीकी और 2009 में आरके शर्मा और आरके प्रसाद के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी को यूपी सरकार ने खारिज कर दिया था। सीबीआई ने एक बार फिर मंजूरी मांगी थी। सीबीआई को ये मंजूरी भ्रष्टाचार विरोधी कानून में 26 जुलाई 2018 को हुए संशोधन के बाद मिली है।

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