चीन को बीआरआई पर लगा तगड़ा झटका, समझिए भारत समेत 7 देशों के आईएमईसी प्लान से कैसे ध्वस्त हो गई पड़ोसी की चालबाजी
नई दिल्ली। जी-20 शिखर बैठक खत्म हो गई, लेकिन इस बैठक ने सदस्य देश चीन को बड़ा झटका दिया है। चीन ने एशिया से अफ्रीका और यूरोप तक अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) योजना के जरिए जो कब्जे का खाका खींचा था, उसे इस बार जी-20 की बैठक में जोरदार झटका लगा है। चीन कई साल पहले बीआरआई की योजना लेकर आया था। उस पर तेजी से काम भी शुरू कराया, लेकिन अब जी-20 देशों के सम्मेलन में जो भू-राजनैतिक हालात बने, उससे चीन की बीआरआई योजना विफल होती दिख रही है। जाहिर है, चीन अब ये तिकड़म जरूर लगाएगा कि अपनी इस योजना को वो किस तरह लागू करे।
बीआरआई योजना में इस बार चीन को सबसे बड़ा झटका यूरोप के अहम देश इटली ने दिया है। सूत्रों के मुताबिक जी-20 की बैठक में शामिल हुईं इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने चीन के पीएम ली कियांग से कह दिया है कि उनका देश अब बीआरआई पर आगे नहीं बढ़ेगा। मेलोनी जब इटली में विपक्ष की नेता थीं, तभी उन्होंने बीआरआई में अपने देश के शामिल होने को बड़ी गलती बताया था। एक तरफ मेलोनी का इनकार और दूसरी तरफ अमेरिका की पहल पर भारत से मध्यपूर्व यानी सऊदी और दुबई होते हुए यूरोप तक रेलवे और जहाज के जरिए परिवहन का खाका खींचे जाने से भी चीन को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने न्यूज चैनल एनडीटीवी से कहा कि जिस नए कॉरिडोर का प्रस्ताव है, वो चीन के बीआरआई से बिल्कुल अलग है। ये प्रोजेक्ट संबंधित देशों के लिए राजस्व लाएगा। जबकि, चीन के बीआरआई ने कई देशों को कर्ज के जाल में फंसा दिया है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी का ये विजन सभी देशों को साथ लाने का है। जो आईएमईसी कॉरिडोर बनेगा, उसमें शामिल देशों की जरूरतों का ख्याल रखा जाएगा और संबंधित देश अपने हिसाब से फैसला लेंगे। बता दें कि आईएमईसी कॉरिडोर को बनाने का फैसला भारत के अलावा अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन, इजरायल और यूरोपीय यूनियन ने तैयार किया है। इसमें भारत से यूएई और सऊदी अरब तक जहाज के जरिए सामान जाएगा। फिर वहां बिछाई जाने वाली रेल पटरी से लाल सागर और फिर जहाज से चीजों को यूरोपीय देशों को भेजा जाएगा।
