बीजेपी और आरएसएस के बड़े नेता पीएफआई के निशाने पर थे!, प्रतिबंधित संगठन के 21 लोगों पर एनआईए कोर्ट ने केस चलाने का किया फैसला
नई दिल्ली। प्रतिबंधित किए गए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के प्रमुख ओएमए सलाम, उप प्रमुख ईएम अबूबकर समेत 21 आरोपियों पर दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने आरोप तय कर दिए हैं। इन सभी पर अलग-अलग गंभीर आरोपों में केस चलेगा। कोर्ट में आरोप तय किए जाने से पहले सलाम और अबूबकर समेत सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया।
पीएफआई का मामला एनआईए के विशेष कोर्ट में चल रहा है। इससे पहले सुनवाई के दौरान विशेष कोर्ट ने पीएफआई के सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का फैसला किया था। जिसके बाद कोर्ट ने ताजा कदम उठाया है। एनआईए ने पीएफआई के गिरफ्तार लोगों पर आरोप लगाया है कि वे हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने की साजिश में शामिल थे। साथ ही एनआईए ने चार्जशीट में दावा किया है कि पीएफआई के इन लोगों का इरादा बीजेपी और आरएसएस के वरिष्ठ लोगों को निशाना बनाने का भी था। चार्जशीट में आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी और यूएपीए की धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
एनआईए ने चार्जशीट में दावा किया है कि पीएफआई के प्रमुख और गिरफ्तार अन्य लोग आतंकवाद के लिए धन जुटाने, आतंकी वारदात की साजिश रचने, हिंसा के लिए ट्रेनिंग कैंप चलाने और लोगों की भर्ती करने का काम करते थे। एनआईए ने सितंबर 2022 में पीएफआई के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ा था। पीएफआई के तमाम ठिकानों पर एनआईए ने छापे मारे थे। इस दौरान ओएमए सलाम और अबूबकर समेत इन आरोपियों की गिरफ्तारी की गई थी। एनआईए का दावा है कि पीएफआई के खिलाफ उसके पास पुख्ता सबूत हैं। इस पूरे मामले की शुरुआत बिहार में पुलिस के छापे से हुई थी। पुलिस ने पीएफआई के ठिकाने पर छापा मारकर 8 पेज का दस्तावेज बरामद किया था। जिसमें भारत को इस्लामी देश बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का जिक्र था।
