ज्ञानवापी, मथुरा और संभल विवाद को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष लोक अदालत भेजा, इन तारीखों में हिंदू-मुस्लिम पक्ष के बीच समझौता कराने की होगी कोशिश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की शाही जामा मस्जिद-श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल की शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर मुद्दों को विशेष लोक अदालत में भेजा है। ये लोक अदालत सुप्रीम कोर्ट परिसर में ही काम करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इन पुराने विवादों को सुलझाने के लिए विशेष लोक अदालत में भेजा है। जहां 21 से 23 अगस्त तक तीनों मामलों को समाधान समारोह के तहत सुलझाने की कोशिश होगी। सुप्रीम कोर्ट ने लोक अदालत में ज्ञानवापी, मथुरा और संभल के मामले भेजने के साथ ही इन मामलों से जुड़े हिंदू और मुस्लिम पक्षों को नोटिस भी जारी किया है।
ज्ञानवापी, मथुरा और संभल मामले में पहले से ही निचली अदालतों में सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट के लोक अदालत में मामले पर विचार से पहले 14 जुलाई को वाराणसी में ज्ञानवापी मसले पर सुनवाई है। मथुरा की शाही जामा मस्जिद मामले में बीती 5 जुलाई को निचली अदालत में मध्यस्थता की कोशिश नाकाम रही थी। ज्ञानवापी मस्जिद को हिंदू पक्ष प्राचीन विश्वेश्वर मंदिर को तोड़कर बनाए जाने का दावा करता है। हिंदू पक्ष के मुताबिक जहां ज्ञानवापी मस्जिद है, वहां प्राचीन विश्वेश्वर का मंदिर था। जिसे मुगल बादशाह औरंगजेब ने तुड़वा दिया। हिंदू पक्ष ने इस मामले में 1991 के पूजा स्थल कानून को चुनौती दी है। वहीं, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने इस कानून के तहत हिंदू पक्ष के दावे का विरोध किया है। निचली अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद का कोर्ट कमिश्नर सर्वे भी कराया था।
मथुरा के बारे में हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने यहां स्थित भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर को गिराकर मस्जिद बनवाई। हिंदू पक्ष के मुताबिक आज जहां शाही जामा मस्जिद है, वो भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मथुरा की शाही जामा मस्जिद में तमाम हिंदू धार्मिक चिन्ह हैं। शाही ईदगाह कमेटी ने इस बारे में दायर केस को पूजा स्थल कानून के तहत सुनवाई योग्य न मानने की मांग कोर्ट से की है। संभल में शाही जामा मस्जिद के बारे में हिंदू पक्ष का कहना है कि वहां भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से संबंधित हरिहर मंदिर था। जिसे मुगल बादशाह बाबर के शासनकाल में गिराकर मस्जिद बनाई गई। निचली अदालत ने यहां कोर्ट कमिश्नर सर्वे भी कराया था। इस दौरान संभल में जमकर हिंसा हुई थी। ज्ञानवापी, मथुरा और संभल के मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे हैं। तीनों मामले मुस्लिम पक्ष ही सुप्रीम कोर्ट ले गया है।
