ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कल का दिन अहम, एएसआई सर्वे की रिपोर्ट से पता चलेगा यहां मंदिर था या नहीं!
वाराणसी। ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सर्वे का काम करने वाले भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण यानी एएसआई कल अपनी रिपोर्ट वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश के कोर्ट में सौंपेगा। एएसआई के जरिए ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराने का आदेश कोर्ट ने दिया था। बताया जा रहा है कि एएसआई ने अपने सर्वे के दौरान ज्ञानवापी परिसर से कई चीजें भी अपने कब्जे में ली हैं। इन चीजों को कलेक्ट्रेट में डीएम की निगरानी में रखने का आदेश जिला जज ने दिया था। जिसके बाद ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ी सभी चीजों को कलेक्ट्रेट के डबल लॉक में रखा गया है। एएसआई को पहले कुछ दिनों के लिए ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे का काम सौंपा गया था, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस सर्वे को चुनौती दी थी। जिसकी वजह से काम रोकना पड़ा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से सर्वे को हरी झंडी मिलने के बाद एएसआई ने अपना काम फिर शुरू किया था। जिसके बाद एएसआई ने 3 बार समयसीमा बढ़ाने की अर्जी दी थी। इस अर्जी को वाराणसी के जिला जज ने मंजूरी दे दी थी।
ज्ञानवापी मस्जिद के बारे में हिंदू पक्ष का दावा है कि उसे प्राचीन विश्वेश्वर मंदिर को गिराकर मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर बनवाया गया। मंदिर में शृंगार गौरी की नियमित पूजा के लिए राखी सिंह समेत कई महिलाओं ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन संभालने वाले इंतेजामिया मसाजिद कमेटी का कहना है कि कोई मंदिर नहीं गिराया गया। दोनों पक्षों के इन दावों की पुष्टि के लिए ही कोर्ट ने एएसआई सर्वे का आदेश दिया था। इससे पहले सिविल जज सीनियर डिविजन ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराया था। उसकी रिपोर्ट पहले ही अदालत को दी जा चुकी है। कोर्ट कमिश्नर ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में बताया था कि ज्ञानवापी मस्जिद में प्राचीन मंदिर के कई चिन्ह दिख रहे हैं।
वाराणसी के जिला जज ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई सर्वे के बारे में गोपनीयता बरतने का निर्देश दिया था। हिंदू और मुस्लिम पक्ष को आदेश दिया गया था कि सर्वे से संबंधित कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगे। इससे पहले कोर्ट कमिश्नर के सर्वे के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग जैसी आकृति मिलने का दावा हिंदू पक्ष ने किया था। वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना था कि ये शिवलिंग नहीं, फव्वारा है। हालांकि, इस बारे में एएसआई से कोर्ट ने जांच नहीं कराई है।
