भारत के सख्त रवैये से एलएसी संबंधी समझौतों को मानने पर चीन राजी, दोनों देशों में तनाव कम होने के आसार
बीजिंग। भारत के सख्त रवैये के बाद अब एलएसी के मसले पर चीन अपना रुख बदलता दिख रहा है। चीन की राजधानी बीजिंग में भारत के सात वर्किंग मैकेनिज्म ऑन कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन की 31वें दौर की बैठक में चीन ने भारत से हुए सीमा समझौतों को मानने पर हामी भरी है। इसके साथ ही चीन और भारत में एलएसी पर तनाव कम करने पर भी सहमति बनी। इससे पहले चीन लगातार अपने रुख पर अड़ा हुआ था। इस बैठक में भारत और चीन की सेना के अफसरों ने भी हिस्सा लिया।
चीन के साथ बैठक के बाद भारत की तरफ से कहा गया कि ये बातचीत स्पष्ट, रचनात्मक और दूरदर्शी रही है। चीन सीमा संबंधी समझौतों का सख्ती से पालन करने पर भी राजी हुआ है। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि बैठक में दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि शांति और स्थिरता के साथ एलएसी के सम्मान और दोनों देशों के संबंधों सामान्य बनाने के लिए पुरानी स्थिति को बहाल करना जरूरी आधार हैं। विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा कि भारत और चीन मतभेद कम करने और पुराने मुद्दों के जल्द समाधान की दिशा में काम करने के वास्ते राजनयिक और सैन्य चैनल के जरिए गहन संपर्क पर भी सहमत हुए हैं।
वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसके और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच महत्वपूर्ण सहमति हुई थी। इसके तहत चीन और भारत सीमा की स्थिति को जल्द से जल्द हल करने के लिए मिलकर काम करने पर राजी हैं। चीन ने कहा है कि बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्र के मुद्दों पर अपने विचार रखे। भारत और चीन ने मतभेद कम किए। इसके अलावा आम सहमति को बढ़ाया और बातचीत को मजबूत करने और एक-दूसरे की उचित चिंताओं पर गौर करने पर भी सहमति जताई।
चीन ने अपने बयान में कहा है कि वो और भारतीय पक्ष सीमा संबंधी समझौतों और भरोसा बनाने के उपायों का सख्ती से पालन करने व सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर भी राजी हुए हैं। भारत और चीन के बीच 2022 से ही तनातनी बढ़ी है। चीन ने एलएसी के पार आकर भारत के इलाकों पर कब्जा करने की कोशिश की। इसकी वजह से पूर्वी लद्दाख के गलवान में दोनों के जवानों में संघर्ष हुआ। जिसमें भारत के कर्नल समेत 20 जवान शहीद हुए और चीन के भी 40 से ज्यादा जवान मारे गए। इस घटना के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर सेना की जबरदस्त तैनाती की। वहीं, चीन भी अपनी कुटिल चाल चलता रहा। उसने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख पर दावा जताना जारी रखा और अरुणाचल प्रदेश में तमाम जगह के नाम भी जारी किए।
