March 10, 2026

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चीन में बिजली आपूर्ति का संकट: फैक्ट्री-मॉल और मोबाइल सेवा ठप, ग्लोबल इकोनॉमी पर असर पड़ने की आशंका

नई दिल्ली। दुनिया की दूसरी सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था होने के तमगे पर इतराने वाला चीन इन दिनों बिजली की भारी कमी से जूझ रहा है। चीन में बिजली आपूर्ति का संकट गहराने के बाद हालात यहां तक आ पहुंचे हैं कि वहां की कम्युनिस्ट सरकार ने कुछ प्रांतों में मौजूद तमाम कंपनियों को उत्पादन में कटौती करने को कहा है, ताकि बिजली की खपत कम की जा सके। इन प्रांतों में घरों की बिजली काटने का सिलसिला भी शुरू कर दिया गया है। इस संकट से एक तरफ जहां चीन की कंपनियों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है तो वहीं विशाल अर्थव्यवस्था के धीमा होने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने का भी खतरा है। इसकी वजह से भारत में कार, टीवी, मोबाइल और दूसरे स्मार्ट गैजेट खरीदने वाले ग्राहकों को महंगाई के रूप में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

चीन में बत्ती गुल होने से क्या होगा असर ?

दुनिया भर में कार और स्मार्टफोन समेत बहुत से इलेक्ट्रौनिक गैजेट के उत्पादन पर इसका असर पड़ेगा। चीन की सारी इकोनॉमिक प्लानिंग Agencies देश के बिजली संकट को दूर करने में जुट गई हैं। चीन पर आई इस मुसीबत का इसलिए भी पूरी दुनिया में देखने को मिलेगा क्योंकि पिछले कुछ सालों में चीन दुनिया के ज्यादातर मुल्कों की फैक्ट्री के लिए कच्चे माल के बड़े सप्लायर के रूप में विकसित हुआ है। दुनियाभर में इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा, प्लास्टिक, कार, ऑटोमोबाइल्स और दूसरी फैक्ट्रियों के लिए जरूरी सामान की आपूर्ति करने के मामले में चीन दुनिया का अग्रणी देश है। चीन के मौजूदा बिजली संकट के लंबा खिंचने की वजह से दुनिया भर की फैक्ट्रियों में काम प्रभावित हो सकता है और इससे ग्लोबल इकोनामी के संकट में आने के साथ ही रोजगार समेत ग्लोबल इकोनॉमी पर काफी असर पड़ने की आशंका है।

चीन में बिजली की दिक्कत कितनी ज्यादा हो गई है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एप्पल और टेस्ला जैसी दिग्गज कंपनियों के कारोबार पर इसका असर पड़ रहा है। दरअसल, इन कंपनियों के कुछ सप्लायर्स को बिजली की कमी के चलते अपने कुछ प्लांट पर काम रोकना पड़ा। करीब 15 चीनी कंपनियों ने कहा कि पावर कट की वजह से उनके प्रोडक्शन पर काफी बुरा असर पड़ा है। वहीं 30 से भी ज्यादा ताइवान की कंपनियों ने भी पावर कट की वजह से काम बंद कर दिया है।

यहां आपको बता दें कि ये वही चीन है, जहां इस साल अगस्त में 2020 की तुलना में करीब 10.1 फीसदी ज्यादा बिजली का उत्पादन हुआ था। वहीं अगर 2019 से तुलना करें तो ये आंकड़ा करीब 15 फीसदी ज्यादा था। कोरोना के बाद चीन में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं यही वजह है कि बिजली की मांग में भी बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिली है।

अब आपके मन में ये सवाल जरूर आ रहा होगा कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद आखिर चीन में ऐसे हालात कैसे पैदा हो गए ?

दरअसल, ये बिजली संकट Manufacturers की बढ़ती मांग के बीच कोयला सप्लाई बाधित होने के कारण पैदा हुआ है। चीन में कुछ बंदरगाह लंबे समय से बंद थे, ऐसे में पावर प्लांट की मांग के हिसाब से कोयले की सप्लाई नहीं हो पाई। ये आपूर्ति अब भी बाधित है और कोयला मंगाने के लिए बंदरगाहों पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, ऐसे में चीन के कई इलाकों में सरकार ने बिजली काटने की घोषणा कर दी है। इन इलाके में मॉल, दुकानें बंद हो गई हैं और फैक्ट्रियों में काम रोकना पड़ा है। अब देखना ये है कि उन्नत तकनीक के मामले में खुद को अमेरिका से बीस समझने वाला चीन कितनी जल्दी इस संकट से उबर पाता है।

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