‘हमें ये तक पता नहीं कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम कहां बैठता है!’, जस्टिस दीपांकर दत्ता ने पारदर्शिता की कमी बताई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के बारे में लंबे वक्त से सवाल उठते रहे हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने कॉलेजियम व्यवस्था खत्म करने के लिए कानून बनाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे रद्द कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने ही कॉलेजियम व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। बार एंड बेंच के मुताबिक जस्टिस दीपांकर दत्ता ने महिला दिवस के मौके पर इंडियन वुमेन इन लॉ के एक कार्यक्रम में कॉलेजियम व्यवस्था पर चिंता जताई।
सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस बनने से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कार्यक्रम में कहा कि कॉलेजियम में पारदर्शिता की इतनी कमी है कि अक्सर जजों को इसका पता नहीं होता कि ये काम कैसे करता है। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने ये भी कहा कि आप जानकर हैरान होंगे कि हम ये तक नहीं जानते कि कॉलेजियम कहां बैठता है! जस्टिस दीपांकर दत्ता ने ये भी कहा कि कॉलेजियम में शामिल किसी जज की असहमति के बावजूद अंतिम फैसला बदलना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि एक महिला जज की नियुक्ति के खिलाफ कॉलेजियम में आवाज उठी, लेकिन उस महिला जज की नियुक्ति हुई।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में पांच वरिष्ठ जज होते हैं। कॉलेजियम ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की राष्ट्रपति से संस्तुति करता है। साथ ही हाईकोर्ट के जजों के ट्रांसफर की सिफारिश भी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम करता है। ये कॉलेजियम किसी कानून के तहत नहीं बनता है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में अभी सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एमएम सुंदरेश हैं। कई बार कॉलेजियम के फैसलों पर सवाल खड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पर जजों की नियुक्त में भाई-भतीजावाद का आरोप भी तमाम लोग लगाते रहे हैं। पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने कॉलेजियम व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है।
