भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान को बड़ा झटका, चीन के समर्थन के बावजूद नहीं बन सका ब्रिक्स संगठन का पार्टनर देश
नई दिल्ली। भारत के कड़े तेवर से पुराने दोस्त चीन की तिकड़म भी पाकिस्तान के अब काम नहीं आ रही है। ताजा मामला ब्रिक्स संगठन का है। भारत ने पाकिस्तान को ब्रिक्स की सदस्यता और पार्टनर देशों की लिस्ट में रखने का विरोध किया था। इसी विरोध की वजह से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है और उसे ब्रिक्स संगठन में कोई जगह नहीं मिल सकी है। वहीं, तुर्किए को ब्रिक्स के पार्टनर देशों की लिस्ट में जगह मिल गई है। जबकि, पाकिस्तान को ब्रिक्स संगठन में शामिल कराने के लिए इसके सदस्य देश चीन ने समर्थन भी दिया था।
रूस ने ब्रिक्स के नए पार्टनर देशों की लिस्ट जारी की है। ब्रिक्स ने अपने नए पार्टनर देशों में बेलारूस, अल्जीरिया, वियतनाम, क्यूबा, कजाकिस्तान, बोलीविया, तुर्किए, नाइजीरिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, उजबेकिस्तान, यूगांडा को शामिल किया है। नए साल यानी 2025 से ये सभी देश ब्रिक्स के पार्टनर होंगे। वहीं, पाकिस्तान इस लिस्ट में आने से महरूम हो गया है। पाकिस्तान के ब्रिक्स पार्टनर देश में शामिल न होने से वहां के जानकार सवाल उठा रहे हैं और इसे पाकिस्तान की विदेश नीति की विफलता मान रहे हैं। खास बात ये है कि भारत ने ब्रिक्स से पाकिस्तान को जोड़ने का विरोध तो किया, लेकिन तुर्किए को पार्टनर देश बनाने पर कुछ नहीं कहा। जबकि, तुर्किए की मौजूदा सरकार भी भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए कई कदम उठा चुकी है।
ब्रिक्स देशों का सदस्य बनाने या पार्टनर देश के तौर पर मान्यता देने के लिए सभी स्थायी सदस्य देशों की मंजूरी जरूरी होती है। पाकिस्तान के पक्ष में चीन के अलावा रूस भी थे, लेकिन भारत ने उसे ब्रिक्स का किसी भी तरह हिस्सा बनाने से साफ इनकार कर दिया। इससे पाकिस्तान को ब्रिक्स संगठन से आर्थिक और राजनयिक समर्थन मिलने के दरवाजे भी बंद हो गए हैं। भारत के सीमापार आतंकवाद संबंधी सख्त रुख से पाकिस्तान के लिए पिछले 10 साल में काफी मुश्किलें खड़ी हो चुकी हैं। भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी संगठनों पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक भी की थी।
