July 4, 2026

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स्तन पकड़ने और पाजामे का नाड़ा तोड़ने को नहीं माना था रेप, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई,

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि लड़की के स्तन को पकड़ना और उसके पाजामे का नाड़ा तोड़ना रेप नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये भी कहा था कि नाबालिग लड़की को पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश भी रेप के प्रावधान के तहत नहीं आती। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए इसे गंभीर मसला बताया और कहा दुख हो रहा है कि कि फैसला देने वाले जज ने पूरी तरह संवेदनहीनता दिखाई। इस मामले में एक याचिका बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी की बेंच में आई थी। बेंच ने उसे खारिज कर दिया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे खुद संज्ञान में लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई है।

रेप के जिस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पीड़ित का स्तन पकड़ना, उसके कपड़े उतारने की कोशिश या नाड़ा तोड़ना रेप नहीं है, वो यूपी के कासगंज का है। कासगंज की महिला ने 12 जनवरी 2022 को ट्रायल कोर्ट में शिकायत दी थी। महिला के मुताबिक 10 नवंबर 2021 की शाम वो 14 साल की बेटी के साथ देवरानी के घर गई थी और शाम को अपने घर लौट रही थी। महिला ने आरोप लगाया कि गांव के ही आकाश, पवन और अशोक ने उसकी बेटी को बाइक से घर छोड़ने की बात कही। उसने भरोसा कर बेटी उनके साथ भेज दी। महिला ने आरोप लगाया कि रास्ते में पवन और आकाश ने बेटी का स्तन पकड़ा और आकाश ने पुलिया के नीचे खींचते हुए पाजामे का नाड़ा तोड़ दिया।

इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों पर रेप और अन्य धाराओं में केस दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को आरोपियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को ये कहकर खारिज कर दिया कि आरोपियों ने पीड़ित का प्राइवेट पार्ट पकड़ा, उसके कपड़े उतारने की कोशिश की और नाड़ा तोड़ दिया, लेकिन ये रेप की कोशिश नहीं मानी जा सकती। रेप की कोशिश साबित करने के लिए साफ इरादा दिखना चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि सिर्फ कपड़े उतारने के इरादे से हमले का ही केस बनता है।